ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों ने रिकवरी दिखाई है। फेडरल रिजर्व (Fed) के अधिकारियों द्वारा महंगाई कम होने के संकेतों पर नरम रुख अपनाने के बाद गोल्ड की कीमत **$4,490** प्रति औंस तक पहुंच गई है।
बाजार की नई चाल
सोने की कीमतों में यह उछाल फेडरल रिजर्व के अधिकारियों, खासकर गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के बयानों के बाद आया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक ठंडे रहते हैं, तो सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है। इस बदलाव ने सितंबर की बैठक में आक्रामक बढ़ोतरी की आशंकाओं को कम कर दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई है, जिसका सीधा फायदा सोने को मिल रहा है।
जियोपॉलिटिकल रिस्क और एनर्जी की चुनौती
जहां मॉनेटरी पॉलिसी से सोना मजबूत हो रहा है, वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने रिस्क बढ़ा दिया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच रहा है। यह एक दोधारी तलवार है—एक तरफ तनाव के कारण सुरक्षित निवेश (safe-haven) के रूप में सोने की मांग बढ़ी है, तो दूसरी तरफ बढ़ती ऊर्जा कीमतों से महंगाई फिर से बढ़ने का डर है, जो फेड को अपनी पॉलिसी फिर से सख्त करने पर मजबूर कर सकता है।
संस्थागत निवेशकों का भरोसा
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई के अंत से अब तक गोल्ड-बैक्ड ETFs में लगभग 93 टन का शुद्ध निवेश (net inflow) देखा गया है। इसके अलावा, डच सेंट्रल बैंक द्वारा अपने गोल्ड रिजर्व को लंदन स्थानांतरित करने जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि वैश्विक स्तर पर बड़े संस्थान आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच फिजिकल एसेट्स को सुरक्षित करने में जुटे हैं।
अगली बड़ी हलचल 11 सितंबर को देखने को मिलेगी, जब अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा जारी होगा। यह डेटा तय करेगा कि फेड अपने मौजूदा नरम रुख पर कायम रहेगा या फिर से आक्रामक रास्ता अपनाएगा।
