Gold की कीमतों में आज **0.4%** का सुधार देखने को मिला है। दो महीने के निचले स्तर से संभलते हुए सोना अब **$4,130** प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, क्योंकि निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गुरुवार को सोने की कीमतों में हल्की रिकवरी दर्ज की गई और यह 0.4% बढ़कर $4,130 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। अगस्त 2026 की शुरुआत के बाद यह धातु अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई थी, जिसके बाद अब इसमें यह मामूली सुधार देखा जा रहा है। यह उतार-चढ़ाव ग्लोबल मार्केट में मौजूद अनिश्चितता को दर्शाता है।
क्यों मिल रहा सोने को सपोर्ट?
सोने की कीमतों को सबसे बड़ा सहारा मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव से मिल रहा है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में शिपिंग लेन्स को लेकर पैदा हुई चिंताओं के कारण निवेशक 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) एसेट की ओर भाग रहे हैं। अस्थिरता के समय सोना हमेशा से ही निवेश का सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जो इसके भाव को एक निचली सपोर्ट देता है।
क्या है गिरावट की वजह?
हालांकि, सोने की बढ़त पर लगाम भी लगी हुई है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि दिसंबर 2026 तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसकी संभावना 80% तक आंकी गई है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने के लिए नेगेटिव होती है क्योंकि सोना कोई ब्याज या रेगुलर इनकम नहीं देता। जब निवेशक सरकारी बॉन्ड्स या कैश डिपॉजिट से अच्छा रिटर्न पा सकते हैं, तो वे सोने में निवेश कम कर देते हैं। साथ ही, डॉलर के मजबूत होने से अन्य करेंसी का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो गया है, जिससे ग्लोबल डिमांड पर भी असर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में फेड के फैसलों और आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर टिकी रहेगी।
