Gold Price: कच्चे तेल की नरमी और ब्याज दरों के डर से सोने में तूफानी तेज़ी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gold Price: कच्चे तेल की नरमी और ब्याज दरों के डर से सोने में तूफानी तेज़ी!
Overview

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई बड़ी गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ओर से ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाने की उम्मीदें कम होने के चलते सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखी गई है। बुधवार को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) करीब **2.4%** चढ़कर **$4,582.18** प्रति औंस पर पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों का निचला स्तर था।

सोने में क्यों आई राहत वाली तेज़ी?

बुधवार को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) में जबरदस्त उछाल देखा गया। कीमतें 2.4% बढ़कर $4,582.18 प्रति औंस पर पहुंच गईं, जो सोमवार को $4,097.99 के चार महीने के निचले स्तर से एक बड़ी रिकवरी है। इस तेजी की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य पूर्व (Middle East) में संभावित अमेरिकी सीजफायर प्लान की खबरों के चलते तेल के दाम 5% से ज़्यादा गिरे।

तेल की कीमतों में नरमी आने से महंगाई (Inflation) बढ़ने की चिंताएं कम हुईं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरें (Interest Rates) तुरंत बढ़ाने की उम्मीदें भी घटीं। मनी मार्केट फ्यूचर्स के अनुसार, अब दिसंबर तक दरें बढ़ने की संभावना घटकर सिर्फ 16% रह गई है, जो हफ्ते की शुरुआत में 25% थी। डॉलर के कमजोर होने का भी कीमती धातुओं को सहारा मिला। स्पॉट सिल्वर (Spot Silver) में 2.8%, प्लैटिनम (Platinum) में 1.8% और पैलेडियम (Palladium) में 1.6% की तेजी आई।

भू-राजनीतिक तनाव और नाजुक स्थिरता का जोखिम

सोने की कीमतों में इस उछाल के बावजूद, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) एक अहम चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान के सैन्य सूत्रों ने बातचीत की अमेरिकी बातों को खारिज कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर की राह अभी आसान नहीं है और ऊर्जा की कीमतें अभी भी एक बड़ा फैक्टर बन सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक तनाव कम होने के ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक बाजार में बड़ी गिरावट का खतरा बना रहेगा।

विश्लेषकों की राय और आगे का रास्ता

कीमती धातुओं ने पिछले हफ्ते बड़ी गिरावट देखी थी, जिसमें सोने का प्रदर्शन 1983 के बाद सबसे खराब रहा था। यह गिरावट तब आई थी जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा था, जो दिखाता है कि बाजार अब सिर्फ 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट के बजाय महंगाई और ब्याज दरों के आउटलुक पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहीं तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों को सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.4876 के करीब कारोबार कर रहा है, जो 25 मार्च, 2026 को 1.83% मजबूत हुआ था, जबकि आमतौर पर यह सोने जैसी डॉलर-नॉमिनेटेड कमोडिटीज के लिए बढ़त को सीमित करता है।

कई बड़े बैंक सोने के लिए 2026 के अंत तक $5,000 से $6,300 प्रति औंस तक के टारगेट प्राइस दे रहे हैं। उनका मानना है कि स्ट्रक्चरल डिमांड और भू-राजनीतिक अनिश्चितता सोने की कीमतों को ऊंचा बनाए रखेंगे।

संरचनात्मक कमजोरियां और भविष्य का अनुमान

सोने की कीमतों में यह तेज उतार-चढ़ाव कुछ संरचनात्मक कमजोरियों की ओर भी इशारा करता है। बाजार का हालिया व्यवहार बताता है कि बढ़ती तेल की कीमतों के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना सोने के 'सेफ हेवन' के दर्जे को चुनौती दे रही है। इससे सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को होल्ड करने की अवसर लागत बढ़ जाती है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि जब तक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी और महंगाई एक चिंता का विषय रहेगी, तब तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। हालांकि, 2026 के लिए सोने की कीमतों के अनुमान अभी भी बुलिश (Bullish) हैं, जिनमें औसत अनुमान $4,819 से $10,023 प्रति औंस तक है। लेकिन इन लक्ष्यों तक पहुंचने का रास्ता केंद्रीय बैंकों के बयानों, महंगाई के आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होगा।

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