6 अगस्त 2026 को सोना 7 हफ्ते की सबसे ऊंची ₹4,293 प्रति औंस पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से बुलियन को सहारा मिला। वहीं, अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, ब्रेंट $79.08 और WTI $74.69 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं।
सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी
6 अगस्त 2026 को सोने की कीमतों में शानदार उछाल देखने को मिला, जिसने बुलियन को पिछले 7 हफ्तों की सबसे ऊंची ₹4,293.12 प्रति औंस के स्तर पर पहुंचा दिया। इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yields) में गिरावट ने ब्याज देने वाली संपत्तियों (Interest-bearing assets) की चमक फीकी कर दी है, जिससे निवेशक गैर-ब्याज वाले कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं।
मार्केट सेंटिमेंट में बड़ा बदलाव
बाजार की यह चाल फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा आक्रामक ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में नरमी का संकेत दे रही है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतें अक्सर बढ़ जाती हैं क्योंकि यह अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ता हो जाता है। निवेशक आर्थिक परिदृश्य का भी पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं, कई लोग इस साल के बाकी हिस्सों के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कितनी वृद्धि की जाएगी, इस पर अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस बदलाव ने सोने को एक अस्थायी बढ़ावा दिया है, जो पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित आश्रय (Safe Haven) के रूप में काम करता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर भू-राजनीतिक असर
जहां सोने में तेजी आई, वहीं कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent Crude Futures) $79.08 प्रति बैरल पर और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $74.69 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता से संभावित राजनयिक प्रगति की रिपोर्टें हैं। बाजार इस संभावना पर प्रतिक्रिया कर रहा है कि ये वार्ताएं हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के स्थिरीकरण का कारण बन सकती हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है।
यदि ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित हो जाती है, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) को कम करने में मदद कर सकती है, जो निवेशकों और केंद्रीय बैंकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है। हालांकि, यह उम्मीद अभी भी नाजुक बनी हुई है।
आगे के जोखिम
वर्तमान मूल्य चालें खबरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, और स्थिति अभी भी अनिश्चित है। राजनयिक प्रगति की आशा के बावजूद, भू-राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। लाल सागर (Red Sea) और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) में हौथी हमलों (Houthi attacks) सहित चल रहे संघर्ष, शिपिंग मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। यदि ये राजनयिक वार्ताएं विफल हो जाती हैं या नए तनाव उत्पन्न होते हैं, तो तेल की कीमतों में वर्तमान गिरावट जल्दी से उलट सकती है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव फिर से बढ़ सकता है।
निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता के संबंध में आधिकारिक बयानों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर किसी भी अपडेट की निगरानी करनी चाहिए। संभावित दर निर्णयों और भू-राजनीतिक अपडेट पर बाजार की प्रतिक्रिया, यह निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी कि सोना और तेल की वर्तमान मूल्य प्रवृत्तियां जारी रहेंगी या नहीं।
