ग्लोबल फैक्टर्स सोने को दे रहे सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) लगभग $5,180-$5,200 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यह उछाल 'सेफ हेवन' (Safe Haven) मांग में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से प्रेरित है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) लगभग 97.56 पर है, जो पिछले एक साल में काफी नरम हुआ है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की आवाजाही और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत जैसी भू-राजनीतिक चिंताओं ने सोने को मूल्य के भंडार (Store of Value) के रूप में और अधिक आकर्षक बना दिया है। इतिहास गवाह है कि वैश्विक अनिश्चितता और संघर्ष के समय निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं।
मॉनेटरी पॉलिसी और टैरिफ का असर
बाजार की धारणा पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें घटाने की उम्मीदों का भी असर दिख रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 तक फेड कई बार ब्याज दरें घटा सकता है। दरें घटने से सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) को होल्ड करने की अवसर लागत कम हो जाती है, जो आमतौर पर इसकी कीमतों को सहारा देती है। इसके अलावा, टैरिफ (Tariff) को लेकर जारी तनाव, जिसमें संभावित रूप से शुल्क वृद्धि शामिल है, को महंगाई बढ़ाने वाला कारक माना जा रहा है और यह सोने के जरिए हेजिंग (Hedging) को बढ़ावा दे रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों का तो यहाँ तक अनुमान है कि अगले बारह महीनों में सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
विश्लेषकों की राय और भारतीय बाजार
प्रमुख वित्तीय संस्थान सोने के लिए बड़े पैमाने पर तेजी का अनुमान लगा रहे हैं। जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) ने अपना लॉन्ग-टर्म फोरकास्ट (Long-term Forecast) बढ़ाकर $4,500 प्रति औंस कर दिया है और 2026 के अंत तक $6,300 का लक्ष्य रखा है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और निवेशकों के बढ़ते निवेश के कारण 2026 के अंत तक सोना $5,400 तक पहुंच जाएगा। वहीं, भारत में 24-कैरेट सोने का भाव ₹160,870 प्रति 10 ग्राम है, जो दुबई की तुलना में लगभग 4.85% अधिक है। यह मजबूत घरेलू मांग का संकेत देता है। फरवरी 2026 तक, गोल्ड माइनर्स ईटीएफ (Gold Miners ETF) का पी/ई (P/E) अनुपात 31.35 था, जो इस सेक्टर में मजबूत उम्मीदों को दर्शाता है।
संभावित जोखिम (Bear Case)
तेजी के इन अनुमानों के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भी बने हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा जिद्दी साबित होती है या आर्थिक विकास पूर्वानुमान से तेज हो जाता है, तो फेडरल रिजर्व अपनी दर-कटौती (Rate-cutting) साइकिल को रोक सकता है। भू-राजनीतिक तनावों में अचानक कमी आने से भी 'सेफ हेवन' मांग घट सकती है, जिससे कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। मौजूदा ऊंचे भाव और भारत में बना प्रीमियम, अगर सपोर्ट करने वाले मैक्रो फैक्टर्स (Macro Factors) कमजोर पड़ते हैं तो मुनाफावसूली (Profit-taking) का कारण बन सकते हैं।
आगे क्या?
विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के दौरान सोने की कीमतों में मजबूती जारी रहेगी, जिसमें $5,400 से $6,300 प्रति औंस के लक्ष्य शामिल हैं। इंडसइंड सिक्योरिटीज (Indusind Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का अनुमान है कि ग्लोबल मार्केट के सकारात्मक रुझानों के चलते MCX गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स ₹162,500 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंक की नीतियां और मुद्रा बाजार की गतिशीलता सोने की चाल तय करेंगी, जबकि सरकारी संस्थानों और निवेशकों से निरंतर मांग कीमतों को और ऊपर ले जाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करने की उम्मीद है।