मंगलवार को सोने के भाव **$4,485** डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गए, जबकि चांदी **2%** चढ़कर **$66.60** पर आ गई। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका में कमजोर जॉब्स डेटा के बाद ब्याज दरों में कटौती हो सकती है।
सोने-चांदी में क्यों आई तेजी?
मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ $4,485 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी में भी जोरदार तेजी देखने को मिली और यह लगभग 2% बढ़कर $66.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। यह उछाल निवेशकों की ओर से अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़ों पर प्रतिक्रिया है, जिससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की नीति बदल सकती है।
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
इस प्राइस राइज़ के पीछे मुख्य वजह यह उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरें घटा सकता है। हाल ही में आए आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 23,000 नौकरियां घटीं और बेरोजगारी दर 4.1% पर आ गई। जब अर्थव्यवस्था धीमी होती है, तो निवेशक अक्सर यह अनुमान लगाते हैं कि ग्रोथ को सहारा देने के लिए सेंट्रल बैंक ब्याज दरें कम कर देगा। ऐसे माहौल में सोने को फायदा होता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। जब सरकारी बॉन्ड या सेविंग अकाउंट जैसी दूसरी इन्वेस्टमेंट पर ब्याज दरें गिरती हैं, तो वैल्यू स्टोर करने के लिए सोना एक बेहतर विकल्प बन जाता है।
भू-राजनीतिक तनाव का भी असर
इस समय भू-राजनीतिक तनाव भी कीमतों में बढ़ोतरी की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अस्थिरता, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग मार्गों को लेकर चिंताएं, निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर रही हैं। अक्सर, वैश्विक राजनीतिक या आर्थिक तनाव के समय सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।
आगे क्या?
अब निवेशकों की नजरें अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 12 अगस्त को और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) 13 अगस्त को जारी होने वाला है। ये रिपोर्टें मापती हैं कि ग्राहकों और व्यवसायों के लिए कीमतें कितनी बढ़ रही हैं। अगर ये नंबर महंगाई के नरम पड़ने का संकेत देते हैं, तो यह ब्याज दरें कम करने के पक्ष में होगा, जिससे सोने की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
जोखिम क्या हैं?
हालांकि, इस ट्रेंड में कुछ जोखिम भी हैं। अगर आने वाले महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा बताते हैं कि कीमतें अभी भी तेजी से बढ़ रही हैं, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरें काटने का फैसला टाल सकता है। इससे सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है, क्योंकि जिन निवेशकों ने रेट कट की उम्मीद में खरीदारी की थी, वे बेचने का फैसला कर सकते हैं। इसके अलावा, आर्थिक आंकड़ों में अप्रत्याशित बदलाव या वैश्विक संघर्षों का बढ़ना इन कीमती धातुओं की कीमतों में अचानक और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ला सकता है। निवेशक कीमती धातुओं की अगली दिशा को समझने के लिए आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर करीब से नजर रखेंगे।
