31 अगस्त, 2026 को भारतीय बाजारों में सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। गोल्ड की कीमतों में प्रति ग्राम **₹135 से ₹142** तक की कमी आई है, जिसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को बड़ी वजह माना जा रहा है।
सोने की कीमतों में हालिया तेजी पर ब्रेक लगा है और 31 अगस्त, 2026 को देश के प्रमुख शहरों में भाव ₹135 से ₹142 प्रति ग्राम तक नीचे आ गए हैं। यह गिरावट 22-कैरेट और 24-कैरेट दोनों ही तरह के सोने में देखी गई है। यह करेक्शन किसी घरेलू मांग की कमी का नतीजा नहीं, बल्कि ग्लोबल बुलियन मार्केट में मची हलचल का परिणाम है।
फेड का 'हॉकिश' रुख और असर
कीमतों पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉर्श की हालिया टिप्पणियां हैं। महंगाई पर उनके सख्त तेवरों ने बाजार को यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। जब फेड ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत देता है, तो गोल्ड जैसे नॉन-इंटरेस्ट बेयरिंग एसेट्स की चमक फीकी पड़ जाती है, जिससे निवेशकों में बिकवाली शुरू हो जाती है।
जियो-पॉलिटिकल टेंशन और MCX का हाल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कमोडिटी मार्केट को एक जटिल स्थिति में ला खड़ा किया है। अमूमन युद्ध के दौर में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के डर ने निवेशकों की सेंटीमेंट को हिला दिया है। इसका सीधा असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिखा, जहां गोल्ड फ्यूचर्स 0.8% से 1.5% तक लुढ़क गए।
क्या निवेशकों को घबराना चाहिए?
अगर हम अगस्त महीने के पूरे प्रदर्शन पर नजर डालें, तो अभी भी गोल्ड 8% से 10% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। ऐसे में यह गिरावट सिर्फ एक मामूली करेक्शन हो सकती है। फिलहाल सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 57% जताई जा रही है। रिटेल निवेशकों को सलाह है कि वे ग्लोबल स्पॉट प्राइस और महंगाई के डेटा पर करीबी नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले समय में यही फैक्टर्स सोने की चाल तय करेंगे।
