Gold Prices: ईरान के प्रस्ताव से सोना चमका, पर फेड की पॉलिसी से लगा ब्रेक

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Prices: ईरान के प्रस्ताव से सोना चमका, पर फेड की पॉलिसी से लगा ब्रेक
Overview

शुक्रवार को Gold Prices में बढ़त देखी गई। ईरान की ओर से एक नया नेगोशिएशन प्रपोजल आने से भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुईं, जिससे स्पॉट गोल्ड **$4,627.63** तक पहुंच गया। वहीं, मजबूत डिमांड और कम इन्वेंट्री के चलते Silver **3%** उछलकर **$75.91** पर आ गया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का इंटरेस्ट रेट **3.50%-3.75%** पर स्थिर रहना और महंगाई को लेकर चिंताएं कीमती धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं।

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ईरान की बातचीत से सोने को सहारा, पर फेड की चाल से लगा झटका

ईरान की ओर से नया नेगोशिएशन प्रपोजल आने के बाद शुक्रवार को सोने की कीमतों में नरमी के शुरुआती संकेत पलट गए। इस प्रस्ताव से भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद जगी, जिसने महंगाई को लेकर चिंताओं को कुछ हद तक शांत किया। नतीजतन, स्पॉट गोल्ड $4,559.48 के निचले स्तर से बढ़कर $4,627.63 प्रति औंस पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) का 97.89 के आसपास कमजोर होना भी सोने के लिए सकारात्मक रहा। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें भी गिरकर $108.83 प्रति बैरल हो गईं, जिससे तुरंत महंगाई बढ़ने का डर कुछ कम हुआ।

सिल्वर में जबरदस्त तेजी, डिमांड और सप्लाई का खेल

सिल्वर (Silver) की बात करें तो इसमें 3% का जोरदार उछाल देखने को मिला और यह $75.91 प्रति औंस पर जा पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रही मजबूत डिमांड और ग्लोबल सप्लाई में लगातार कमी। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 तक सप्लाई में 46.3 मिलियन औंस की कमी रह सकती है, जो 2025 की तुलना में 15% ज्यादा है। खास तौर पर सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) जैसे सेक्टरों से बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेश की वजह से यह असंतुलन बना हुआ है। इस दौरान प्लैटिनम (Platinum) $2,015.50 और पैलेडियम (Palladium) $1,563.90 पर चढ़े।

फेड का रुख, महंगाई और आगे का अनुमान

भू-राजनीतिक राहत के बावजूद, आर्थिक कारक कीमती धातुओं के बाजार को आकार दे रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने अपनी 29 अप्रैल 2026 की मीटिंग के बाद बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट को 3.50%-3.75% पर स्थिर रखा। फेड के सख्त (hawkish) रुख ने 2026 में जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका दिया है। लगातार बनी हुई महंगाई, जिसका एक हिस्सा ईरान संघर्ष से जुड़ी ऊर्जा सप्लाई में रुकावटों से भी है, एक बड़ी चिंता बनी हुई है। एनालिस्ट्स अब यह अनुमान लगा रहे हैं कि ब्याज दरों में कटौती 2027 के अंत तक या संभवतः 2026 में बिल्कुल भी नहीं हो सकती है। ऐसे माहौल में, जहां ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियां ट्रेजरी बॉन्ड जैसी आय-उत्पादक निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाती हैं।

ईरान के प्रस्ताव से मिली उम्मीदें शायद अस्थायी हों। फेडरल रिजर्व का महंगाई पर काबू पाने के लिए ऊंची दरें बनाए रखने पर जोर सोने के लिए जोखिम पैदा करता है। यदि महंगाई लगातार बनी रहती है, तो फेड दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जिससे सोना आय-जनरेट करने वाली संपत्तियों की तुलना में कम आकर्षक हो जाएगा। UBS के एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि अमेरिकी चुनाव की अनिश्चितता और टैरिफ वार्ताओं को देखते हुए, सोना 2026 के अंत तक $5,900 प्रति औंस तक पहुंच सकता है, लेकिन वे स्वीकार करते हैं कि ऊंची रियल यील्ड और मजबूत डॉलर से निकट अवधि में लाभ सीमित हो सकता है। अन्य संस्थान 2026 के अंत तक सोने की कीमतें $4,000 से $6,300 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे हैं, जिसमें सेंट्रल बैंक की खरीदारी और फेड की संभावित ब्याज दर कटौती का समर्थन रहेगा। हालांकि, जारी महंगाई और फेड का सतर्क रवैया कीमतों में और उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।

सिल्वर को भी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके प्रोडक्शन में सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल होता है, जो तेल और गैस उत्पादन से जुड़ा है, जिससे सप्लाई चेन कमजोर पड़ती है। एनर्जी मार्केट में रुकावटें सीधे तौर पर सिल्वर की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं। 2021 के बाद से सिल्वर इन्वेंट्री में कुल 762 मिलियन औंस की कमी, बाजार की नाजुकता को दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.