महंगाई का बढ़ता डर बना बड़ी वजह
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई (Inflation) का दबाव बढ़ता दिख रहा है। ऐसे माहौल में सेंट्रल बैंक्स अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को और टाइट करने का सोच रहे हैं, जो गोल्ड जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को निवेशकों के लिए कम आकर्षक बनाती है।
मजबूत डॉलर ने और बढ़ाया दबाव
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मजबूत होने ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। बाजार को उम्मीद है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, और संभवतः दिसंबर तक इनमें और बढ़ोतरी भी हो सकती है, ऐसे में गोल्ड की जगह बॉन्ड्स (Bonds) जैसे निवेश ज्यादा फायदेमंद लग रहे हैं।
भारत के इम्पोर्ट नियमों का भी असर
भारत की बात करें तो, सरकार द्वारा गोल्ड इम्पोर्ट (Gold Import) के नियमों को और सख्त करने के उपायों का भी कीमतों पर असर पड़ रहा है। इन नीतियों का मकसद रुपये को सहारा देना और देश के भारी-भरकम इम्पोर्ट बिल को कम करना है।
विश्लेषकों की क्या है राय?
आगे चलकर, विश्लेषकों का अनुमान है कि गोल्ड की कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर रह सकती हैं। हालांकि, अमेरिका-चीन ट्रेड (US-China Trade) की बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर रखनी होगी। इंडसइंड सिक्योरिटीज (Indusind Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी (Jigar Trivedi) का कहना है कि MCX गोल्ड जून फ्यूचर्स ₹161,500 प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं, जबकि ₹162,500 का स्तर एक सीलिंग का काम करेगा। निवेशकों को घरेलू और ग्लोबल दोनों बाजारों की चाल पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।