Gold Price: भू-राजनीतिक तनाव और Fed की अनिश्चितता से भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर, जानिए क्या है वजह

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Price: भू-राजनीतिक तनाव और Fed की अनिश्चितता से भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर, जानिए क्या है वजह
Overview

Gold के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच, सोने ने फिर से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर अपनी चमक बिखेरी है।

भू-राजनीतिक तनाव और Fed की उलझन सोने की तेजी की मुख्य वजह

फिलहाल, स्पॉट गोल्ड की कीमतें करीब $5,185 प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं, जबकि भारत में MCX गोल्ड फ्यूचर ₹160,026 प्रति किलोग्राम के स्तर को छू रहा है। ये ऊंचे भाव बाजार में मौजूद कई बड़ी वजहों का नतीजा हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की अनिश्चित मॉनेटरी पॉलिसी।

मध्य पूर्व का बढ़ता तनाव और सप्लाई का डर

इस जबरदस्त तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी का है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास के हालात चिंता का विषय बने हुए हैं। President Trump की ओर से एक महत्वपूर्ण समय सीमा (deadline) का इंतजार है और ऐसे में बड़ी संख्या में सैन्य संपत्तियों की तैनाती ने बाजार को जोखिम प्रीमियम (risk premium) का एहसास कराया है। आपको बता दें कि दुनिया के करीब 25% सी-बोर्न तेल का व्यापार इसी जलडमरूमध्य से होता है। ऐसे में, यहां किसी भी तरह की रुकावट ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, और इसी डर के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस तनाव के माहौल में फिजिकल सिल्वर मार्केट में भी काफी मांग देखी गई है, जिसके चलते COMEX सिल्वर इन्वेंटरी 100 मिलियन औंस से नीचे आ गई है।

Fed की पॉलिसी पर अनिश्चितता और महंगाई की चिंता

वहीं, फेडरल रिजर्व (Fed) की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चल रही अनिश्चितता भी मार्केट में हलचल मचा रही है। फेड की जनवरी 2026 की मीटिंग के मिनट्स से यह बात सामने आई है कि कुछ अधिकारी ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं, खासकर अगर महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है। जनवरी 2026 का CPI डेटा 2.4% सालाना और कोर इन्फ्लेशन 2.5% रहा, जो दर्शाता है कि महंगाई अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। इसी पॉलिसी अनिश्चितता और ऊंचे स्तर पर पहुंचे स्पेकुलेटिव कैपिटल के कारण 30 जनवरी, 2026 को मार्केट में एक बड़ी गिरावट देखी गई थी, जब गोल्ड की कीमतें 12% और सिल्वर 35% तक टूट गए थे।

विश्लेषकों का भरोसा और भविष्य की राह

इन उतार-चढ़ावों के बावजूद, कई ब्रोकरेज फर्म्स (जैसे J.P. Morgan और UBS) लंबी अवधि के लिए गोल्ड के भावों को लेकर काफी बुलिश (Bullish) हैं। उनका अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक गोल्ड $5,000 से $5,400 प्रति औंस के स्तर को छू सकता है, और BMO जैसी फर्म्स तो $6,500 प्रति औंस तक की उम्मीद भी जता रही हैं। चीन जैसे देशों की लगातार गोल्ड खरीद और वैश्विक स्तर पर मैक्रो अनिश्चितता इन अनुमानों को सहारा दे रही है। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yield) फिलहाल करीब 4.09% है, और यील्ड कर्व में आई इनवर्जन (Inversion) जैसी स्थिति भी आर्थिक सुस्ती का संकेत दे रही है, जो ऐतिहासिक रूप से सोने के लिए फायदेमंद साबित होती है।

जोखिम और आगे की राह

हालांकि, गोल्ड की इस रैली में कुछ जोखिम भी छिपे हैं। अगर फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है और ब्याज दरें बढ़ाता है, तो यह गोल्ड जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स के लिए निगेटिव हो सकता है। इसके अलावा, जनवरी में देखी गई तेज गिरावट इस बात का सबूत है कि मार्केट कितना वोलेटाइल (Volatile) हो सकता है। भू-राजनीतिक तनाव भले ही फिलहाल सोने को सपोर्ट कर रहा है, लेकिन अगर यह वाकई एक बड़े संघर्ष में बदलता है, तो इसके अप्रत्याशित आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में, गोल्ड की आगे की चाल काफी हद तक अमेरिकी-ईरान संबंधों और फेडरल रिजर्व के महंगाई पर एक्शन पर निर्भर करेगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.