गोल्ड की कीमतें फिलहाल $4,405 से $4,456 प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रही हैं। अमेरिकी जॉब डेटा की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच निवेशक अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
बाजार में जारी रस्साकशी
सोने की कीमतें 7 सितंबर, 2026 को $4,405 से $4,456 प्रति औंस के दायरे में रहीं। बाजार फिलहाल दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है—एक तरफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े हैं, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension)।
फेड रेट हाइक का दबाव
सोने पर दबाव की मुख्य वजह अमेरिकी लेबर मार्केट का मजबूत होना है। अगस्त में अमेरिका में 162,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो उम्मीद से बेहतर हैं। इस मजबूती के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 15-16 सितंबर को होने वाली बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 60% तक पहुंच गई है। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ सकती है, क्योंकि गोल्ड पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जिससे निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
वैश्विक तनाव और सपोर्ट
दूसरी ओर, मिडिल ईस्ट में तनाव, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास की घटनाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दिया है। ब्रेंट क्रूड $97 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। जब भी वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक गोल्ड को 'सेफ हेवन' (Safe Haven) मानते हैं, जो कीमतों को गिरने से बचा रहा है।
भारतीय बाजारों पर असर
घरेलू बाजार में भी इसका सीधा असर दिख रहा है। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स शुक्रवार को ₹1,52,815 प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुए। भारतीय निवेशक वैश्विक संकेतों के साथ-साथ रुपये की चाल और इंपोर्ट ड्यूटी पर भी नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए अब 11 सितंबर को आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा। यह रिपोर्ट तय करेगी कि फेडरल रिजर्व आगे क्या रुख अपनाएगा। जब तक ये आंकड़े नहीं आते, सोने की कीमतें सीमित दायरे में ही रहने की उम्मीद है।
