ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें **$4,191** प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। निवेशकों की नजर अब **2 अक्टूबर** को आने वाले अमेरिकी जॉब्स डेटा पर टिकी है।
सोने की चाल इस समय दो ध्रुवों के बीच फंसी हुई है। एक तरफ अमेरिकी ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ भारत और चीन की फेस्टिव डिमांड बाजार को सहारा दे रही है।
अमेरिकी इकोनॉमी का असर
गोल्ड पर इस समय सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का है, जो करीब 5.3% के स्तर पर बनी हुई है। सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी इसमें निवेश करने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स पर अच्छा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स को तरजीह देते हैं। इसके अलावा, मजबूत डॉलर के कारण भी सोने की चमक फीकी पड़ रही है।
बाजार अब 2 अक्टूबर को जारी होने वाले अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जो सोने की कीमतों के लिए निगेटिव संकेत है।
फिजिकल डिमांड का सहारा
ग्लोबल मार्केट में भले ही दबाव हो, लेकिन एशिया में डिमांड 'सेफ्टी नेट' का काम कर रही है। चीन में 'गोल्डन वीक' की छुट्टियां चल रही हैं, वहीं भारत में शादियों और त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। आभूषणों की बढ़ती मांग सोने की कीमतों को एक 'फ्लोर' (सपोर्ट) दे रही है। भारतीय निवेशकों के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी अहम है, क्योंकि रुपया कमजोर होने पर सोना और महंगा हो जाता है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों को 28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर नजर रखनी चाहिए। तब तक सोने की दिशा पूरी तरह से अमेरिकी डेटा और ब्याज दरों पर आने वाले संकेतों से तय होगी।
