ग्लोबल संकेतों के बीच सोने की कीमतों में ठहराव देखा जा रहा है। 10 ग्राम सोना फिलहाल ₹148,000 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय बाजारों में सोना फिलहाल एक कंसोलिडेशन फेज से गुजर रहा है। सितंबर में बने ₹165,000 के रिकॉर्ड हाई से फिसलने के बाद, अब कीमती धातु ₹148,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड कर रही है। अब बाजार की नजरें अमेरिकी आर्थिक डेटा पर टिकी हैं, जो सोने की अगली दिशा तय करेंगे।
यील्ड और गोल्ड का बदलता रिश्ता
आमतौर पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी सोने के लिए नेगेटिव मानी जाती है, क्योंकि यह नॉन-यील्डिंग एसेट है। लेकिन मौजूदा दौर में निवेशक यील्ड बढ़ने को सिर्फ इकोनॉमी की मजबूती नहीं, बल्कि बढ़ते राजकोषीय घाटे और कर्ज की स्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं। यही वजह है कि ऊंची ब्याज दरों के बावजूद सोने ने अपनी वैल्यू बनाए रखी है।
टेक्निकल लेवल और सपोर्ट
चार्ट पर नजर डालें तो ₹145,500 से ₹146,000 का दायरा एक मजबूत सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। अगर सोना इस लेवल से नीचे फिसलता है, तो और कमजोरी आ सकती है। वहीं, तेजी की राह में ₹150,500 एक अहम रुकावट है। इस स्तर को पार करने के बाद ही बाजार में नई बुलिश लहर देखी जा सकेगी।
संस्थागत निवेशकों का भरोसा
सोने को बड़ा सहारा बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) से मिल रहा है। अगस्त से सितंबर के बीच ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 187 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक भी हर तिमाही 250 से 300 टन सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को एक 'फ्लोर' (सपोर्ट) मिल रहा है।
अगले कुछ दिनों में US के PCE इन्फ्लेशन आंकड़े और फेडरल रिजर्व के अपडेट्स पर बाजार की पैनी नजर होगी। हालांकि अक्टूबर में रेट हाइक की संभावना 20% से कम है, लेकिन महंगाई के आंकड़े सोने की चाल में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
