घरेलू बाजार में सोने का वायदा भाव **₹1,53,000** प्रति **10 ग्राम** के स्तर के करीब स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सतर्क हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 8 सितंबर, 2026 तक सोने के वायदा भाव ₹1,52,800 से ₹1,53,550 प्रति 10 ग्राम के सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब होने के बावजूद, मार्केट में अभी भी सतर्कता का माहौल है क्योंकि ट्रेडर अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा भांपने की कोशिश कर रहे हैं।
फेड का रुख और बाजार की चिंता
बाजार में इस अनिश्चितता की मुख्य वजह फेडरल रिजर्व का अगला फैसला है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार के अनुमान से बेहतर हैं। इस मजबूत लेबर मार्केट के कारण यह उम्मीद बढ़ गई है कि महंगाई को काबू में रखने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। फिलहाल, बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना करीब 60% आंकी जा रही है।
सोना, बॉन्ड और डॉलर का गणित
निवेशकों के लिए समझना जरूरी है कि सोना किसी तरह का ब्याज या डिविडेंड नहीं देता है। जब अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि वे बेहतर रिटर्न देते हैं। इससे निवेश का पैसा सोने से निकलकर बॉन्ड्स की ओर चला जाता है। साथ ही, ब्याज दरों की उम्मीद बढ़ने से अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है।
सुरक्षित निवेश (Safe Haven) का सहारा
इन दबावों के बावजूद सोने में बड़ी गिरावट नहीं आई है, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। निवेशक सोने को 'सेफ-हेवन' एसेट मानते हैं, यानी संकट के समय वे इसे खरीदना पसंद करते हैं। यह मांग सोने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है।
आगे क्या रखें ध्यान?
अब निवेशकों की नजरें अमेरिका के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर टिकी हैं। ये आंकड़े महंगाई की तस्वीर साफ करेंगे और इसी के आधार पर फेडरल रिजर्व अपना अगला कदम तय करेगा। इन आंकड़ों में किसी भी तरह का बड़ा अंतर सोने की कीमतों में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
