MCX पर सोने के वायदा भाव में हाल ही में **2.2%** की मजबूती आई और यह **₹1.47 लाख** प्रति 10 ग्राम के करीब बंद हुआ। अमेरिकी ब्याज दर की नीतियों पर सुराग के लिए निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे कीमतों में स्थिरता आई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने हालिया रिकवरी को आधार प्रदान किया है।
सोने-चांदी में आई स्थिरता, जानिए क्या है वजह?
जून के उतार-चढ़ाव भरे महीने के बाद सोना बाजार में अब स्थिरता का दौर देखा जा रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों ने मजबूती दिखाई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 2.2% की रिकवरी दर्ज की गई, जिससे यह ₹3,216 बढ़कर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया। यह उछाल चार हफ्तों की गिरावट के ट्रेंड को खत्म करने वाला साबित हुआ, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में $4,000 प्रति औंस के ऊपर सोने को मजबूत सपोर्ट मिला है।
कीमती धातुओं की रैली को ये फैक्टर दे रहे हैं सहारा
सोने और चांदी की हालिया कीमतों में स्थिरता के पीछे मैक्रोइकॉनॉमिक बदलाव और बाजार की रणनीतिक चालों का मिश्रण है। अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और 'शॉर्ट-कवरिंग' (जहां निवेशक पहले के दांव को बंद करने के लिए संपत्ति वापस खरीदते हैं) ने बुलियन को ओवरसोल्ड टेरिटरी से उबरने में मदद की। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग कीमतों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मई में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने अपनी आधिकारिक रिजर्व में 41 टन सोना जोड़ा, जो अनिश्चितता के खिलाफ एक बचाव (hedge) के रूप में धातु में निरंतर रुचि को दर्शाता है।
चांदी ने हाल ही में सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। MCX पर सितंबर वायदा 6.2% यानी ₹13,938 बढ़कर ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। यह आउटपरफॉर्मेंस अक्सर चांदी की दोहरी भूमिका से जुड़ी होती है - एक कीमती धातु और एक औद्योगिक कमोडिटी के रूप में। हालिया बढ़त के बावजूद, विश्लेषकों का कहना है कि बाजार कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों, खासकर रूस और यूक्रेन से जुड़े संकटों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जो अक्सर सुरक्षित-निवेश (safe-haven) की मांग को बढ़ाते हैं।
आने वाले आर्थिक संकेतकों पर नजर
निवेशक अब आगामी अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें सर्विसेज पीएमआई (Services PMI), ट्रेड डेटा और साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स शामिल हैं। इन रिपोर्टों से फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की रणनीति को आकार देने में मदद मिलने की उम्मीद है। बाजार विशेष रूप से 8 जुलाई को जारी होने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मीटिंग मिनट्स पर केंद्रित है। इन मिनट्स से नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दरों में समायोजन को लेकर आंतरिक असहमति की सीमा पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, जो जून की नीतिगत चर्चाओं के दौरान सामने आया था।
बाजार के जानकार प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं जैसे यूरोजोन, चीन, जर्मनी और जापान से भी महंगाई के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि सोने ने हालिया गिरावट से ऊपर सफलतापूर्वक स्थिरता हासिल कर ली है, लेकिन आने वाले दिनों में इसकी गति संभवतः अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड की दिशा और डॉलर की मजबूती पर निर्भर करेगी।
