Gold Price: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के 22 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से सोने की चमक फीकी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Price: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के 22 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से सोने की चमक फीकी

US 30-year ट्रेजरी यील्ड के **5.5%** तक पहुंचने के बाद गोल्ड की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में रेट हाइक की **68%** संभावना के चलते सोने के भाव **$4,300** के आसपास सुस्त बने हुए हैं, हालांकि सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने इसे एक मजबूत सहारा दिया है।

सोने की चाल फिलहाल थम सी गई है। पिछले तेजी के दौर के बाद अब मार्केट में ठहराव है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना है। 30-year ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.5% के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले दो दशकों में सबसे अधिक है। चूंकि गोल्ड पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक अपना पैसा सोने से निकालकर बॉन्ड मार्केट की ओर मोड़ने लगते हैं।

फेड पॉलिसी का असर

निवेशकों की नजरें पूरी तरह से फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में 25-basis-point की ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना है। इसके पीछे ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई और सप्लाई चेन की समस्याएं मुख्य कारण हैं। जब फेड दरें बढ़ाता है, तो डॉलर मजबूत होता है, जिससे अन्य करेंसी रखने वालों के लिए सोना महंगा हो जाता है।

सेंट्रल बैंकों का सुरक्षा चक्र

गिरावट के बावजूद सोने में बड़ी बिकवाली नहीं दिख रही है। इसका मुख्य कारण दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी है। People's Bank of China और यूरोपियन फंड्स कीमतों में गिरावट पर लगातार अपना रिजर्व बढ़ा रहे हैं। ग्लोबल COMEX एक्सचेंज पर $4,200 से $4,250 के बीच एक मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं, घरेलू मार्केट में Multi Commodity Exchange (MCX) पर एक्सपर्ट्स ₹1,49,000 से ₹1,50,000 के स्तर को अहम सपोर्ट मान रहे हैं।

आगे क्या करें निवेशक?

मार्केट को फिलहाल एक बड़े ट्रिगर का इंतजार है। यदि US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है या डॉलर की मजबूती कम होती है, तो सोने में फिर से रौनक लौट सकती है। इसके अलावा, जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता (Geopolitical instability) भी एक बड़ा फैक्टर है, जो कभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की डिमांड बढ़ा सकती है। जब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक सोना इसी कंसोलिडेशन फेज में रहने के आसार हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.