अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें एक हफ्ते के निचले स्तर **$4,100** प्रति औंस पर आ गई हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय रुपये का मजबूत होना है।
सोने की कीमतों में गिरावट की वजह?
घरेलू बाजार में सोने की कीमतें एक हफ्ते के निचले स्तर $4,100 प्रति औंस पर आ गई हैं। यह गिरावट मुख्य रूप से भारतीय रुपये के मजबूत होने के कारण देखी जा रही है।
कच्चे तेल का खेल और रुपये का दम
रुपये के मजबूत होने का सबसे बड़ा कारण सऊदी अरब का फैसला है। सऊदी अरब ने एशियाई बाजारों के लिए कच्चे तेल की एक्सपोर्ट प्राइसेज (Export Prices) कम कर दी हैं। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (Importer) है, ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का डॉलर के रूप में खर्च कम हो जाता है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो सोना जैसी कीमती धातुओं का आयात सस्ता हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतों में गिरावट आती है।
ग्लोबल इकोनॉमी और निवेशकों का डर
मुद्रा में उतार-चढ़ाव के अलावा, अमेरिकी इकोनॉमी के आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता सोने के बाजार को प्रभावित कर रही है। निवेशक इस समय कोई भी बड़ा कदम उठाने से हिचकिचा रहे हैं। वे यूएस फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की जून की मीटिंग के मिनट्स (Minutes), महंगाई के नए आंकड़े और रोजगार से जुड़े डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
सोना एक ऐसी संपत्ति है जिस पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता। जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर ब्याज देने वाली संपत्तियों में लगाते हैं। इसी वजह से, कई ट्रेडर्स (Traders) अभी सोने में बड़ी पोजीशन लेने से बच रहे हैं, जब तक कि उन्हें मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) की दिशा साफ न हो जाए। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता भी बाजार पर नजर रखने वालों के लिए अहम है, क्योंकि इससे ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट (Risk Sentiment) और सुरक्षित माने जाने वाले सोने जैसी संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, मजबूत रुपया और ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा का इंतजार सोने की कीमतों की दिशा तय कर रहा है।
