Multi Commodity Exchange (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स में लगातार चौथे दिन कमजोरी देखी गई है। इस हफ्ते सोने के दाम **3%** से ज्यादा टूट चुके हैं। निवेशक इस समय Federal Reserve के चेयरमैन केविन वॉर्श के Jackson Hole Symposium में होने वाले भाषण पर नजर टिकाए बैठे हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल है।
भारत में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को लगातार चौथे दिन सोना लाल निशान में बंद हुआ। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में पिछले चार सत्रों में लगभग 3.25% की गिरावट आई है, जो प्रति 10 ग्राम करीब ₹5,318 की कमी के बराबर है। यह गिरावट ग्लोबल मार्केट के रुख के अनुरूप ही है, जहां स्पॉट गोल्ड अपने तीन महीने के ऊपरी स्तर से फिसल चुका है।
Jackson Hole का इम्पैक्ट
बाजार में इस अस्थिरता की मुख्य वजह वायोमिंग में चल रहा Jackson Hole Economic Policy Symposium है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजरें Federal Reserve चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण पर हैं। निवेशकों को यह संकेत चाहिए कि अमेरिकी ब्याज दरों का भविष्य क्या होगा। जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो गोल्ड पर दबाव बढ़ता है क्योंकि बिना ब्याज देने वाले एसेट की तुलना में सरकारी बॉन्ड्स ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।
महंगाई और मॉनेटरी पॉलिसी
फेड के अगले कदमों को लेकर चिंता अमेरिकी आर्थिक डेटा से जुड़ी है। जुलाई में अमेरिका का PCE इन्फ्लेशन रेट 3.7% (साल-दर-साल) रहा, जो महंगाई के बने रहने का संकेत है। इसका सीधा मतलब है कि फेड को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी सख्त रखनी पड़ सकती है। अगर फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होंगे, जो सोने की कीमतों पर भारी पड़ सकते हैं।
बाजार में रस्साकशी
फिलहाल गोल्ड मार्केट में एक तरह की रस्साकशी चल रही है। एक तरफ निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ईरान पर नए प्रतिबंध जैसे जियोपॉलिटिकल रिस्क सोने के लिए सपोर्ट का काम कर रहे हैं। हालांकि, अभी फेड पॉलिसी की उम्मीदें इन रिस्क फैक्टर्स पर भारी पड़ती दिख रही हैं। निवेशकों के लिए अब बॉन्ड यील्ड और फेड की कमेंट्री पर नजर रखना सबसे जरूरी है, जो आने वाले समय में सोने की दिशा तय करेंगे।
