Gold Prices: 'युद्धविराम' की उम्मीदों से सोना-चांदी गिरे, पर निवेशकों के लिए है ये बड़ा सपोर्ट!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold Prices: 'युद्धविराम' की उम्मीदों से सोना-चांदी गिरे, पर निवेशकों के लिए है ये बड़ा सपोर्ट!
Overview

**4 मई, 2026** को Gold और Silver की कीमतों में मामूली नरमी देखने को मिली। West Asia में युद्धविराम की उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव में आई थोड़ी कमी इसके पीछे मुख्य कारण रहे, लेकिन Central banks और Asian investors की लगातार खरीदारी कीमतों को सहारा दे रही है।

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बाजार में आज Gold और Silver की चाल पर भू-राजनीतिक घटनाओं और लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक ट्रेंड्स के बीच एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में युद्धविराम को लेकर आ रही खबरें कीमतों में थोड़ी हलचल पैदा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर खरीदारों और फिजिकल मार्केट से मिल रही लगातार डिमांड इन कीमती धातुओं के मूल्य को मजबूती दे रही है।

4 मई, 2026 को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) लगभग $4,600 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था, जिसमें मामूली गिरावट आई। इसी तरह, Silver की कीमतों में भी नरमी रही। यह सब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और चल रही युद्धविराम बातचीत के बीच हुआ। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता अक्सर Gold जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe-haven assets) की मांग बढ़ाती है, लेकिन बाजार की भावना (Market Sentiment) मिली-जुली नजर आई। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें 3 मई, 2026 को लगभग $109 प्रति बैरल पर बनी रहीं, जिसका मुख्य कारण प्रमुख शिपिंग मार्गों में सप्लाई की दिक्कतें थीं। ऊर्जा की ये बढ़ी हुई कीमतें महंगाई (Inflation) की चिंता को बढ़ा रही हैं, जो ऐतिहासिक रूप से कीमती धातुओं के लिए फायदेमंद साबित होती हैं।

कीमती धातुओं ने 2024 के अंत से अन्य संपत्तियों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें Gold लगभग 65% और Silver 170% तक चढ़ा है। इस शानदार परफॉरमेंस के पीछे मजबूत मांग है। 2026 की पहली तिमाही (Q1) में ग्लोबल Gold की मांग कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिसमें सेंट्रल बैंकों ने 244 टन Gold खरीदा। खास तौर पर Asian investors ने फिजिकल Gold की मांग को बढ़ाया, जबकि मार्च 2026 में US-आधारित Gold ETF से कुछ निकासी (Outflows) देखी गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के अनुसार, 2026 की Q1 में कुल Gold की मांग 1,231 टन रही, जो निवेश (Bar and coin investment) से प्रेरित होकर $193 बिलियन के रिकॉर्ड मूल्य पर पहुंची। Gold की कीमतें जनवरी 2026 में $5,405 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब गिरकर $4,600 के आसपास आ गई हैं। Silver की बात करें तो, विश्लेषकों का कहना है कि लगातार पांचवें साल सप्लाई की कमी (Supply Deficits) बनी हुई है। इसके साथ ही सोलर (Solar), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs) और AI जैसे सेक्टरों से औद्योगिक मांग (Industrial Demand) बढ़ रही है, जिससे 2026 में Silver की कीमतें $65 के पार जाने के अनुमान हैं। जूलियस बेयर (Julius Baer) के कार्सटेन मेनके (Carsten Menke) जैसे जानकारों का मानना है कि यह मजबूत फिजिकल डिमांड और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी कीमतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही है। भले ही ग्लोबल महंगाई में नरमी आने का अनुमान है, लेकिन लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks) कीमती धातुओं के बाजार को मजबूत बनाए रखेंगे।

हालांकि, कुछ बड़े जोखिम भी बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े राजनयिक समाधान (Diplomatic Resolution) से भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Risk Premium) तेजी से कम हो सकता है, जिससे कीमतें तेज़ी से गिर सकती हैं। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) पॉलिसी भी एक बड़ी बाधा है। फेड फंड्स रेट (Federal Funds Rate) 3.5% से 3.75% के स्तर पर है और बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) ऊंचे हैं, ऐसे में Gold जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों (Non-interest-bearing assets) को रखने में एक बड़ा अवसर लागत (Opportunity Cost) आती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर (US Dollar) भी कीमतों पर दबाव बना रहा है। 2026 की शुरुआत में Gold फ्यूचर्स (Gold Futures) ने $5,600 प्रति औंस के स्तर को पार किया था, लेकिन लगातार ऊंचे इंटरेस्ट रेट की उम्मीदों के कारण यह वापस गिर गया। Silver की 2024 के अंत से हुई बड़ी बढ़ोतरी के कारण इसमें अधिक अस्थिरता (Volatility) और तेज़ी से गिरावट का खतरा भी हो सकता है, खासकर अगर औद्योगिक मांग धीमी हो जाती है या सप्लाई की दिक्कतें उम्मीद से जल्दी हल हो जाती हैं।

आगे चलकर, विश्लेषकों को उम्मीद है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता Gold की मांग को प्रभावित करती रहेगी, जिससे सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और बढ़ेगी। 2026 के लिए Gold की कीमतों का अनुमान आम तौर पर $4,500 से $4,700 प्रति औंस के बीच है, और कुछ आर्थिक परिस्थितियों में यह $5,000 तक भी पहुंच सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का मानना है कि लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक कारक Gold की मांग, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और खुदरा निवेशकों के निवेश को बनाए रखेंगे। Silver के लिए, लगातार बनी हुई सप्लाई की कमी और बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण कीमतों में और तेजी आने की संभावना है, जिसमें लक्ष्य $65 से ऊपर जा सकते हैं। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बावजूद, कीमती धातुओं का मौलिक दृष्टिकोण (Fundamental Outlook) मजबूत मांग की ओर इशारा करता है, जो उनके सुरक्षित निवेश (Safe-haven appeal) के रूप में अपील और अंतर्निहित सप्लाई-डिमांड की बुनियादी बातों से प्रेरित है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.