भारतीय बाजार में सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है। पिछले आठ ट्रेडिंग सेशंस में सोने के दाम **4%** गिरकर **₹1,54,884** प्रति 10 ग्राम पर आ गए हैं। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण रुपये में आई मजबूती है, जिसके चलते खरीदार अब भी इंतजार की मुद्रा में हैं।
रुपये की मजबूती बनी 'कूलिंग एजेंट'
सोने की कीमतों में यह 4% की गिरावट मुख्य रूप से भारतीय रुपये के डॉलर के मुकाबले मजबूत होने के कारण आई है। भारत अपनी सोने की अधिकांश जरूरतें आयात से पूरी करता है, इसलिए करेंसी की चाल सीधे रिटेल प्राइस को प्रभावित करती है। विदेशी मुद्रा (FCNR) डिपॉजिट में $127 बिलियन के बड़े इनफ्लो के कारण रुपया काफी मजबूत हुआ है, जिससे आयात सस्ता हो गया है और घरेलू बाजार में सोने के दाम गिरे हैं।
ग्राहकों का 'वेट एंड वॉच' मोड
कीमतें घटने के बावजूद बाजार में फिलहाल सुस्ती छाई है। खरीदारों को उम्मीद है कि दाम और नीचे आ सकते हैं, इसलिए वे फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं। फेस्टिव सीजन और शादियों का सीजन करीब होने के बावजूद रिटेल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में कमी देखी जा रही है।
स्ट्रक्चरल दबाव और चुनौतियां
कीमतों में राहत के बावजूद सोने पर 15% की इंपोर्ट ड्यूटी बरकरार है, जो सरकार ने ट्रेड डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए लगा रखी है। इसके अलावा, सरकारी स्तर पर गैर-जरूरी सोने की खपत को कम करने की अपील का भी असर दिख रहा है। लॉन्ग टर्म में शादियों की डिमांड तो मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, लेकिन अगर रुपये में अचानक कमजोरी आती है, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिर से तेजी दिखा सकती हैं। अब निवेशकों की नजर करेंसी की स्थिरता और फेस्टिव डिमांड पर टिकी है।
