दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने के भाव में **₹3,200** की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह **₹1,42,000** प्रति 10 ग्राम के 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। ग्लोबल स्तर पर बिकवाली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है।
बाजार में मची हलचल
दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार दूसरे दिन हुई भारी बिकवाली के कारण सोना ₹3,200 टूटकर ₹1,42,000 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, बाजार में अनिश्चितता के बीच निवेशकों का भरोसा कम हुआ है, जो आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं।
फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का असर
सोने की चमक फीकी पड़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) का ब्याज दरों को लेकर सख्त स्टैंड है। फेड का मानना है कि ऊंची ब्याज दरें फिलहाल जारी रहेंगी, जिससे सोने जैसे नॉन-यिल्डिंग एसेट (non-yielding assets) बॉन्ड या कैश के मुकाबले कम आकर्षक हो गए हैं। इसके अलावा बढ़ती ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
फोर्स लिक्विडेशन की मार
इक्विटी मार्केट में टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में आई गिरावट ने स्थिति को और खराब कर दिया है। पोर्टफोलियो पर दबाव के चलते निवेशक कैश जुटाने के लिए सोने-चांदी को बेच रहे हैं, जिसे 'फोर्स लिक्विडेशन' कहा जा रहा है। इसका असर ग्लोबल स्पॉट गोल्ड पर भी दिखा, जो 4% गिरकर $3,875.55 प्रति औंस पर आ गया है।
चांदी की हालत और भविष्य
चांदी पर दबाव और भी गहरा है, जिसकी कीमत ₹4,200 घटकर ₹1,86,000 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। चूंकि चांदी का इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्र में भी होता है, इसलिए आर्थिक उतार-चढ़ाव का इस पर असर सोने से कहीं ज्यादा पड़ता है।
आने वाले दिनों में अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनाव और पॉलिसी बदलाव कमोडिटी मार्केट के लिए रिस्क बढ़ा सकते हैं। जब तक ब्याज दरों और आर्थिक मांग में स्थिरता नहीं आती, कीमती धातुओं में रिकवरी की उम्मीद कम है।
