Gold Price Today: भू-राजनीतिक तनाव से सोने की कीमत ₹1,44,500 के पार, चांदी भी चमकी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Price Today: भू-राजनीतिक तनाव से सोने की कीमत ₹1,44,500 के पार, चांदी भी चमकी

22 जुलाई को घरेलू सोने की कीमतों में ₹1,600 से ज्यादा का उछाल आया और यह ₹1,44,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते सेफ-हेवन डिमांड का बढ़ना है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले से पहले भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.59 पर आ गया, जिससे कीमती धातुओं को और मजबूती मिली।

Detailed Coverage

सोने में आई तूफानी तेजी, वजह बनी ग्लोबल टेंशन

22 जुलाई को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई। भाव करीब दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचकर ₹1,44,500 प्रति 10 ग्राम के पार निकल गए। इस उछाल का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते बढ़ी ग्लोबल अनिश्चितता है। जब भी वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक बाजार की अनिश्चितता से बचने के लिए सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (safe-haven assets) की ओर रुख करते हैं।

कमोडिटी मार्केट में गोल्ड-सिल्वर की चाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी यही सेंटीमेंट देखने को मिला। गोल्ड फ्यूचर्स (अगस्त डिलीवरी) 1.35% चढ़कर ₹1,44,875 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की सितंबर वायदा में भी 0.69% की तेजी आई और यह ₹2,25,334 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। घरेलू बाजार की यह मजबूती अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट के रुझान के अनुरूप है, जहां कॉमेक्स पर सोना 1.17% बढ़कर $4,123.90 प्रति औंस और चांदी 1.07% बढ़कर करीब $60 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

रुपये का कमजोर होना और कच्चे तेल का असर

भू-राजनीतिक चिंताओं के अलावा, मैक्रोइकॉनोमिक माहौल भी कीमतों को प्रभावित कर रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे कमजोर होकर 96.59 पर बंद हुआ। कमजोर रुपया भारत के लिए सोने का आयात महंगा कर देता है, जो स्थानीय कीमतों को सहारा देता है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें भी $94 प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें अक्सर रुपये पर दबाव डालती हैं, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ता है।

आगे क्या है संकेत?

आगे चलकर, बाजार की नजरें 29 जुलाई को होने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले पर टिकी हैं। निवेशक ब्याज दरों पर फेड के रुख का इंतजार कर रहे हैं। जहां उच्च ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को कम आकर्षक बनाती हैं, वहीं दरों में ठहराव या कटौती सोने के लिए और समर्थन प्रदान कर सकती है। विश्लेषक यूएस डॉलर इंडेक्स पर भी नजर रख रहे हैं, जो फिलहाल 101 के आसपास स्थिर है। इसमें कोई भी बड़ा बदलाव सोने और चांदी की अगली चाल तय कर सकता है।

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक संघर्षों और नीतिगत संकेतों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। टेक्निकल लेवल्स भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, जहां विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,200 के आसपास प्रतिरोध (resistance) का सामना कर सकता है। अगर कीमतें $4,000 के अहम सपोर्ट स्तर को बनाए रखने में विफल रहती हैं, तो सेंटीमेंट में बदलाव आ सकता है। इसी तरह, चांदी का प्रदर्शन वर्तमान स्तरों को बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.