Gold Price Today: डॉलर कमजोर, सोने में आई ₹1,43,397 की उछाल!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Price Today: डॉलर कमजोर, सोने में आई ₹1,43,397 की उछाल!

4 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। बाज़ार अब अमेरिकी रोज़गार के आंकड़ों पर नज़र रखे हुए है, जिससे फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों की अगली चाल का अंदाज़ा लग सके। निवेशकों को चिंता है कि ये आर्थिक संकेत आने वाले हफ्तों में कीमती धातुओं की मांग को कैसे प्रभावित करेंगे।

सोने-चांदी में क्यों आई तेजी?

4 अगस्त को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक आर्थिक रुझानों में बदलाव का संकेत दे रही है। अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 0.34% बढ़कर ₹1,43,397 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की फ्यूचर कीमत 1.12% बढ़कर ₹2,19,180 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इन बढ़तों के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों का कम होना है, जिसने कमोडिटी बाज़ारों में अस्थिरता को कुछ हद तक कम किया है।

कीमतों पर इन चीज़ों का है असर

कीमतों का यह रुझान अचानक भू-राजनीतिक झटकों के बजाय बाहरी मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों से ज़्यादा प्रेरित है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना सोने के लिए एक सहायक माहौल बनाता है, क्योंकि डॉलर के कमजोर पड़ने पर सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.47% का उछाल आया और यह $4,109.90 प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि Comex एक्सचेंज पर चांदी में 1.84% की ज़्यादा तेज़ी देखी गई।

अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर फोकस

अब निवेशकों का ध्यान अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के आगामी नीतिगत निर्णयों पर केंद्रित है। केंद्रीय बैंक की ब्याज दर की रणनीति बुलियन (सोना-चांदी) के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों को निवेशकों के लिए कम आकर्षक बनाती हैं। बाज़ार विशेष रूप से इस हफ़्ते जारी होने वाले प्रमुख अमेरिकी लेबर डेटा का इंतज़ार कर रहा है, जिसमें ADP रोज़गार परिवर्तन (ADP Employment Change) रिपोर्ट, नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls), और राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर (Unemployment Rate) शामिल हैं।

यह रोज़गार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक माने जा रहे हैं। यदि डेटा मज़दूर बाज़ार में नरमी का संकेत देते हैं, तो यह फेडरल रिज़र्व द्वारा अधिक सतर्क ब्याज दर दृष्टिकोण की उम्मीदों को मज़बूत कर सकता है, जो सोने की कीमतों को और प्रभावित कर सकता है। इसके विपरीत, उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत रोज़गार वृद्धि मौजूदा ब्याज दरों के स्तर को कब तक बनाए रखा जा सकता है, इस पर बाज़ार की उम्मीदों को बदल सकती है।

निकट भविष्य में निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य बात इन आर्थिक रिपोर्टों की निरंतरता और फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों द्वारा किसी भी बाद की टिप्पणी पर निर्भर करेगी। चूंकि बाज़ार एक स्थापित ट्रेडिंग रेंज में बना हुआ है, इसलिए प्रतिभागी आगामी रोज़गार डेटा में ऐतिहासिक औसत या विश्लेषक की अपेक्षाओं की तुलना में किसी भी महत्वपूर्ण अंतर पर प्रतिक्रिया करने की संभावना रखते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.