MCX पर घरेलू सोने की कीमतों में ₹2,000 का उछाल आया है, जिससे यह **₹1,49,200** प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। रुपये में डॉलर के मुकाबले **0.5%** की कमजोरी इस तेजी का मुख्य कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत हो रहा है, लेकिन भारत में इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के कारण फिजिकल डिमांड पर दबाव बना हुआ है।
क्या हुआ?
22 जून 2026 को भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव लगभग ₹2,000 बढ़कर ₹1,49,200 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी वैश्विक रुझानों के अनुरूप है, जहां अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर सोने की कीमतें $4,210 प्रति औंस के पार चली गई हैं।
रुपये का सोने पर असर?
घरेलू कीमतों में इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना है। रुपया डॉलर के मुकाबले 0.5% फिसलकर 94.7 पर आ गया। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सोना आयात करता है, और यह कमोडिटी वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में ही तय होती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो समान मात्रा में सोना खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं, भले ही अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें स्थिर रहें।
इंपोर्ट ड्यूटी का मांग पर असर
कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारत में सोने की फिजिकल डिमांड पर काफी दबाव देखा जा रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में सोने का आयात 39% घटकर $3.4 बिलियन रह गया। यह भारी गिरावट मुख्य रूप से सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% करने का नतीजा है। इस बढ़ी हुई टैक्स दर ने स्थानीय खरीदारों के लिए लागत बढ़ा दी है, जिससे फिजिकल सोने की खरीद में उल्लेखनीय कमी आई है।
ETF का प्रवाह और निवेशकों का सेंटिमेंट
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) में हाल ही में रुझान बदलता हुआ दिखा है। मई में, इन फंडों से ₹7.25 बिलियन का रिकॉर्ड बहिर्वाह (outflow) देखा गया था। हालांकि, जून की शुरुआत में स्थिति बदली, जब 1 जून से 11 जून के बीच ₹16.31 बिलियन का शुद्ध अंतर्वाह (inflow) दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि जहां फिजिकल खरीदार ऊंची कीमतों और टैक्स के कारण सतर्क हैं, वहीं वित्तीय निवेशक ईटीएफ के जरिए सोने में अपनी रुचि बनाए हुए हैं।
निवेशक आगे क्या देखें?
बाजार के प्रतिभागी अब आगामी अमेरिकी रोजगार डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़े शामिल हैं। इस डेटा से अमेरिकी डॉलर की चाल पर असर पड़ने की उम्मीद है, जो सोने की कीमतों के लिए एक प्रमुख वैश्विक कारक है। घरेलू स्तर पर, निवेशक मौसमी मांग पैटर्न पर नजर रख सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से, भारत में शादियों और त्योहारी सीजन के नजदीक आने के साथ अगस्त से मांग में सुधार होता है।
