सितंबर के तीसरे दिन सोने की कीमतों में शानदार रिकवरी देखने को मिली है। COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स उछलकर **$4,467.20** प्रति औंस पर पहुंच गया है। कमजोर अमेरिकी डॉलर और उम्मीद से खराब जॉब डेटा ने फेडरल रिजर्व की ओर से आक्रामक ब्याज दरों की बढ़ोतरी की चिंताओं को कम कर दिया है, जिससे बुलियन मार्केट को बड़ा सहारा मिला है।
बाजार में सुधार के मुख्य कारण
सोने की कीमतों ने 3 दिन की गिरावट के बाद वापसी की है। COMEX गोल्ड फ्यूचर्स में 1.19% की बढ़त देखी गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा, जहां MCX पर अक्टूबर गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 0.09% बढ़कर ₹1,52,544 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी में भी तेजी रही और यह 1.29% उछलकर $66.30 प्रति औंस पर पहुंच गई।
जॉब डेटा का असर
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह अगस्त का ADP रिपोर्ट है, जिसमें अमेरिका में केवल 38,000 नई प्राइवेट-सेक्टर नौकरियां जुड़ने की बात सामने आई है। चूंकि सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है—यानी इस पर कोई नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता—इसलिए जब अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिलते हैं, तो फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो जाती हैं, जो सोने के लिए सकारात्मक होता है।
मार्केट रिस्क और आगे क्या?
हालांकि बाजार में तेजी है, लेकिन निवेशकों को अभी सतर्क रहना चाहिए। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने भले ही टैरिफ के असर पर राहत दी हो, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बड़ा रिस्क बना हुआ है। अगर महंगाई फिर से बढ़ी, तो फेडरल रिजर्व दोबारा ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जो सोने के लिए निगेटिव होगा।
फिलहाल, निवेशकों की निगाहें आने वाली 'यूएस नॉन-फार्म पेरोल्स' और अनइंप्लॉयमेंट रिपोर्ट पर हैं। इन आंकड़ों से तय होगा कि अमेरिकी इकोनॉमी की स्थिति क्या है और आगे मार्केट किस दिशा में जाएगा।
