इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें **$4,178** प्रति औंस के स्तर को पार कर गई हैं। वहीं, भारत में **24K** सोना **₹1,49,746** प्रति **10 ग्राम** के करीब ट्रेड कर रहा है। निवेशक अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जो गोल्ड की आगे की चाल तय करेंगे।
बाजार की हलचल और महंगाई का असर
9 अक्टूबर, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण अमेरिका की आने वाली Consumer Price Index (CPI) रिपोर्ट को लेकर बाजार की उम्मीदें हैं। सोने में आई यह उछाल निवेशकों को थोड़ी राहत तो दे रही है, लेकिन सावधानी अभी भी बनी हुई है क्योंकि महंगाई के आंकड़े वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं का ट्रेंड तय करते हैं।
फेडरल रिजर्व और सोने का रिश्ता
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा संबंध U.S. Federal Reserve की मौद्रिक नीति से है। गोल्ड एक Non-yielding एसेट है, यानी इस पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। जब अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर भागते हैं। इसके विपरीत, अगर केंद्रीय बैंकों के रेट हाइक को रोकने की उम्मीद जगती है, तो सोना फिर से एक सुरक्षित निवेश के रूप में चमकने लगता है। अभी निवेशक इसी पशोपेश में हैं कि क्या महंगाई के आंकड़े फेड को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने पर मजबूर करेंगे?
तकनीकी नजरिया और भारतीय बाजार
तकनीकी जानकारों के अनुसार, सोना हाल ही में $4,100 के दो महीने के निचले स्तर से संभला है, लेकिन इसे ऊपर बने रहने के लिए अपने मुख्य Resistance Levels को तोड़ना होगा। वहीं भारतीय निवेशकों के लिए एक और बड़ा फैक्टर Rupee-Dollar एक्सचेंज रेट है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव स्थिर भी रहें, तो भी रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
अगले कुछ दिनों में निवेशकों को U.S. Dollar Index और Treasury Yields पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इनमें कोई भी बदलाव सोने की कीमतों में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
