US फेडरल रिजर्व के गवर्नर Christopher Waller के बयानों के बाद सोने की कीमतों में **2%** तक का उछाल देखने को मिला है। सितंबर में ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
बाजार का मूड क्यों बदला?
फेडरल रिजर्व के गवर्नर Christopher Waller के हालिया संकेतों ने बाजार की दिशा बदल दी है। उन्होंने इशारा किया है कि आने वाली 15-16 सितंबर की मीटिंग में सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगा सकता है। इस खबर के बाद, सितंबर में रेट हाइक की संभावना 63% से गिरकर 50% के स्तर पर आ गई है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर
ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद के साथ ही US डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट देखी गई है। सोना, जो एक नॉन-इंटरेस्ट पेइंग एसेट है, उस पर ऊंची ब्याज दरों का दबाव कम हुआ है। डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया है, जिसका सीधा असर कीमतों में तेजी के रूप में दिखा। चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसे अन्य कीमती धातुओं में भी तेजी दर्ज की गई है।
भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन डिमांड
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं ने भी सोने की चमक बढ़ाई है। अनिश्चितता के दौर में निवेशक अक्सर सोने को 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) मानकर इसमें पैसा लगाते हैं, जिससे सोने की मांग और बढ़ गई है।
आगे क्या है नजर रखने वाली बात?
निवेशक अब शुक्रवार को आने वाले नॉन-फार्म पेरोल डेटा और अगले हफ्ते जारी होने वाले कंज्यूमर एवं प्रोड्यूसर इन्फ्लेशन (महंगाई) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। यदि ये डेटा अर्थव्यवस्था में सुस्ती दिखाते हैं, तो फेड की ओर से दरें न बढ़ाने का फैसला पक्का हो सकता है। वहीं, अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो फेड को अपना आक्रामक रुख जारी रखना पड़ सकता है, जिससे सोने की हालिया तेजी पर ब्रेक भी लग सकता है।
