ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में आज **2.8%** का उछाल देखा गया और भाव **$4,380** प्रति औंस पर पहुंच गए। क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में नरमी से निवेशकों का सेंटीमेंट सुधरा है, जिससे पिछले तीन दिनों की गिरावट पर ब्रेक लग गया है।
बाजार में कैसे लौटा भरोसा?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी के बाद बाजार में घबराहट थी, जिसके चलते लगातार तीन दिनों तक सोने में सुस्ती देखी गई। लेकिन अब बॉन्ड यील्ड के ठंडे पड़ने से सोने जैसे 'नॉन-यिल्डिंग' एसेट्स के लिए रास्ता साफ हो गया है।
क्रूड ऑयल का इम्पैक्ट
सोने की तेजी का सीधा कनेक्शन क्रूड ऑयल से भी है। ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें अपने हालिया हाई से नीचे आई हैं। वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन संबंधी दिक्कतें कम होने और सऊदी अरब द्वारा पाइपलाइन बहाली के संकेतों ने एनर्जी कॉस्ट को घटाया है। भारत के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि इससे महंगाई पर लगाम लगेगी और रुपये पर दबाव कम होगा, जो घरेलू मार्केट में सोने की कीमतों को कंट्रोल करने में मदद करता है।
संस्थागत निवेशकों की मांग (Institutional Demand)
बाजार की अनिश्चितता के बावजूद, गोल्ड ईटीएफ (ETFs) में लगातार 8 दिनों से पैसा आ रहा है। यह साफ दिखाता है कि बड़े निवेशक गिरावट पर खरीदारी (Buy on Dips) कर रहे हैं और सोने को एक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
आगे क्या रखें ध्यान?
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि गोल्ड की कीमतें अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के प्रति संवेदनशील हैं। अगर डॉलर और मजबूत होता है, तो सोने की बढ़त सीमित हो सकती है। फिलहाल, फेडरल रिजर्व की भविष्य की पॉलिसी और ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा पर बाजार की पैनी नजर बनी रहेगी।
