अगस्त में करीब **15%** की दमदार उछाल के बाद सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी इकोनॉमी के मजबूत आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका दिया है, जिससे निवेशकों का रुख थोड़ा सतर्क हो गया है।
सोने की कीमतों में 27 अगस्त 2026 को गिरावट देखी गई, जो $4,700 प्रति औंस के करीब पहुंचे तीन महीने के उच्चतम स्तर से नीचे आ गया है। यह करेक्शन एक लंबी तेजी के बाद आया है, जिसमें अगस्त महीने के दौरान मेटल ने लगभग 15% का रिटर्न दिया था।
क्यों घटे दाम?
हालिया गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी इकोनॉमी के मजबूत आंकड़े हैं, विशेष रूप से PCE इंफ्लेशन और GDP के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। मजबूत इकोनॉमिक डेटा से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। चूंकि सोने से कोई डिविडेंड या फिक्स्ड ब्याज नहीं मिलता, इसलिए बॉन्ड यील्ड के बढ़ने पर गोल्ड का आकर्षण कम हो जाता है।
ग्लोबल संकट का सपोर्ट
गिरावट के बावजूद, ग्लोबल अनिश्चितता के कारण सोने की डिमांड अभी भी बनी हुई है। ईरान के साथ जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राजकोषीय स्थिति को लेकर चिंताएं निवेशकों को गोल्ड की तरफ सुरक्षित निवेश के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसे 'डिबेसमेंट ट्रेड' भी कहा जाता है, जहां निवेशक करेंसी की वैल्यू गिरने के डर से सोना खरीदते हैं।
भारतीय बाजार का हाल
घरेलू बाजार में भी ग्लोबल रुझानों का असर दिखा। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुआ। फिलहाल भारतीय निवेशक हालिया तेजी के बाद तकनीकी मुनाफावसूली (Profit Booking) और भविष्य की चाल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
बाजार की नजर अब 28 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले जैक्सन होल (Jackson Hole) इकोनॉमिक सिम्पोजियम पर है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों के भविष्य को लेकर क्या संकेत देता है। अगर फेडरल रिजर्व का रुख सख्त रहता है, तो सोने में और अधिक मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स की मजबूती भी सोने की कीमतों के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है।
