सोने में आई तूफानी गिरावट: 16% सस्ता हुआ सोना, निवेशकों को झटका!
कीमती धातुओं के बाजार में फरवरी 2026 की शुरुआत में एक बड़ा करेक्शन देखने को मिला। सोने की कीमतों में 16% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 29 जनवरी से 2 फरवरी के बीच हुई। यह गिरावट इतनी तेज थी कि 30 जनवरी को अकेले एक दिन में सोने के भाव में 10% का जबरदस्त फॉल आया, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी एकदिनी (single-day) गिरावट थी। इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के मोटा मुनाफा मिटा दिया। सोना अपने हालिया शिखर $5,594.82 प्रति औंस (29 जनवरी) से करीब $900 प्रति औंस सस्ता हो गया, जिससे साल की शुरुआत से हुई सारी बढ़त लगभग खत्म हो गई।
आखिर क्यों गिरी सोने की कीमतें? वजहें-
आखिर इस भारी गिरावट की वजह क्या थी? यह किसी एक फैक्टर से नहीं, बल्कि कई वजहों के मेल से हुआ। जो निवेशक पहले की तेजी का फायदा उठा रहे थे, उन्होंने जमकर प्रॉफिट-बुकिंग की, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने भी सोने पर दबाव डाला, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से डॉलर के मजबूत होने पर सोने का भाव गिरता है। एक और बड़ा कारण था CME ग्रुप का गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन की आवश्यकताओं को बढ़ाना। इन्होंने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर मार्जिन को 6% से बढ़ाकर 8% (या 6.6% से 8.8%) कर दिया। इससे ट्रेडिंग महंगी हो गई और संभवतः बढ़त के दौरान बनाई गई स्पेकुलेटिव पोजीशन (speculative positions) को लिक्विडेट (liquidate) करना पड़ा। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित चेयरपर्सन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम की चर्चा ने भी सेंटीमेंट को बदला। उनके हॉकिश (hawkish) रुख के संकेत मिले, जिससे ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद जगी, जो सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) के लिए अच्छी खबर नहीं होती।
वित्त मंत्री की राय, ग्लोबल अनिश्चितताएं और सेंट्रल बैंक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस उठापटक पर कहा कि सोने की अस्थिरता (volatility) की मुख्य वजह ग्लोबल अनिश्चितताएं (global uncertainties) हैं। उनका मानना था कि किसी एक करेंसी पर भरोसा न होने की वजह से निवेशक सोने की ओर भाग रहे हैं, जैसा कि सेंट्रल बैंक भी अपने गोल्ड होल्डिंग्स (gold holdings) को बढ़ाकर कर रहे हैं। यह ग्लोबल ट्रेंड के अनुरूप है, जहां सेंट्रल बैंक भू-आर्थिक अनिश्चितताओं (geoeconomic uncertainty) के बीच रिजर्व को अमेरिकी डॉलर से डाइवर्सिफाई (diversify) कर रहे हैं। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि चीन के स्पेकुलेटर्स (speculators) के मार्केट से निकलने के कारण भी बिकवाली बढ़ी, जब कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थीं। हालिया तेज गिरावट के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स इसे ट्रेंड में बड़े बदलाव के बजाय एक टेक्निकल करेक्शन (technical correction) मान रहे हैं।
भविष्य का क्या है संकेत? एक्सपर्ट्स अभी भी बुलिश!
इस भारी गिरावट के बावजूद, कई बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस 2026 के लिए सोने को लेकर अभी भी बुलिश (bullish) हैं। UBS ने अपने अनुमानों को संशोधित करते हुए अब $6,200 प्रति औंस तक का लक्ष्य दिया है, हालांकि साल के अंत तक यह $5,900 के आसपास आ सकता है। JP Morgan ने साल के अंत 2026 के लिए अपना टारगेट बढ़ाकर $6,300 प्रति औंस कर दिया है। उनका मानना है कि सेंट्रल बैंकों और निवेशकों की मांग लगातार बनी रहेगी और बढ़ेगी। Deutsche Bank ने भी 2026 में सोने का भाव $6,000 प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है, जिसका मुख्य कारण निवेशक और सेंट्रल बैंकों की जारी मांग है। ये अनुमान बताते हैं कि भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन मीडियम-टर्म में स्ट्रक्चरल डिमांड (structural demand) सोने की कीमतों को सपोर्ट करेगी।