सोने की 'सेफ-हेवन' की चमक फीकी?
सोने की कीमतें 14% गिरकर $5,278 से $4,576 पर आ गई हैं। यह गिरावट चौंकाने वाली है क्योंकि आम तौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय सोना 'सेफ-हेवन एसेट' (safe-haven asset) का काम करता है और इसकी कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन, इस बार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद सोने में तेजी की जगह गिरावट देखी जा रही है।
महंगे तेल का सोने पर असर
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतों में पिछले एक महीने में 40% का उछाल आया है। ऐसे में, तेल आयात करने वाले देशों के लिए एनर्जी इम्पोर्ट बिल बढ़ गया है। इन बढ़ी हुई लागतों को पूरा करने के लिए, कई देश अपने सोने के भंडार (gold reserves) बेच रहे हैं, ताकि एनर्जी इम्पोर्ट के लिए जरूरी यूएस डॉलर (U.S. dollars) जुटा सकें। इसी वजह से सोने के भावों पर दबाव आ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह ट्रेंड बताता है कि सोने की कीमतों में तब तक रिकवरी मुश्किल है जब तक तेल की कीमतें स्थिर नहीं हो जातीं। इसका असर सिर्फ सोने तक सीमित नहीं है; मंदी की आशंकाओं के बीच फाइनेंशियल एसेट्स की डिमांड घटने से शेयर (stocks) और बॉन्ड (bonds) भी गिर रहे हैं। निवेशकों के सामने मुश्किल विकल्प हैं: या तो वे लंबे समय में अच्छे मुनाफे की उम्मीद में कीमती एसेट्स को गिरती कीमतों पर खरीद सकते हैं, या फिर एसेट वैल्यू में और गिरावट और आर्थिक मंदी के जोखिम को झेल सकते हैं। जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते, उनके लिए फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।