लगातार **7%** की तेजी के बाद सोने की कीमतों में अब ठहराव देखने को मिल रहा है। ग्लोबल निवेशक जैक्सन होल (Jackson Hole) संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण पर नजर टिकाए हुए हैं, जिससे ब्याज दरों और महंगाई पर स्पष्टता मिल सकती है।
पिछले पांच दिनों की आक्रामक तेजी के बाद सोने की कीमतों में अब सुस्ती छाई है। कीमती धातु में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जहाँ COMEX Gold $4,698 पर कारोबार कर रहा है, जो कि इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस $4,715 से नीचे है। वहीं, चांदी में भी मामूली गिरावट देखी गई और यह $68.50 के स्तर पर आ गई है। यह रुझान बताता है कि बाजार अब भारी खरीदारी से निकलकर 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में आ गया है।
क्यों है निवेशकों को इंतजार?
कमोडिटी मार्केट की पूरी नजर 27 से 29 अगस्त तक होने वाली जैक्सन होल इकोनॉमिक पॉलिसी संगोष्ठी पर है। इसमें 28 अगस्त को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का की-नोट संबोधन सबसे अहम माना जा रहा है। मई 2026 में कार्यभार संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा नीतिगत संबोधन होगा, जिसमें वे बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की रणनीति पर कुछ संकेत दे सकते हैं।
तेजी की असल वजह
सोने में आई हालिया रैली के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड मार्केट में किए गए सरकारी हस्तक्षेप का बड़ा हाथ था। बॉन्ड बायबैक के चलते निवेशकों ने 'डिबेसमेंट ट्रेड' (debasement trade) का सहारा लिया, जिसमें सरकारी खर्च और लिक्विडिटी के कारण डॉलर की वैल्यू गिरने के डर से सोने को एक सुरक्षित निवेश (Hedge) माना गया। गोल्ड की कीमतें 200-डे मूविंग एवरेज के ऊपर बनी हुई हैं, जो एक महत्वपूर्ण टेक्निकल लेवल है।
आगे के रिस्क और ध्यान रखने वाली बातें
बाजार के जानकारों की नजर अब आने वाले अमेरिकी इंफ्लेशन डेटा, यानी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) रिपोर्ट पर है। यदि महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो फेडरल रिजर्व को सख्त ब्याज दरें बरकरार रखनी पड़ सकती हैं, जो सोने जैसे नॉन-यिल्डिंग एसेट पर दबाव डाल सकती हैं।
इसके अलावा, ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही कूटनीतिक चर्चाओं पर भी नजरें हैं। भारत में सोने के निवेशकों के लिए इन ग्लोबल डेवलपमेंट्स को ट्रैक करना बेहद जरूरी है, क्योंकि MCX पर होने वाली ट्रेडिंग और घरेलू ज्वेलरी मार्केट सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों से प्रभावित होते हैं।
