मिडिल ईस्ट की टेंशन ने सोने को दिए पंख
मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी मांग और कीमतों में भारी उछाल आया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब भी दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, तो सोने को एक भरोसेमंद 'सेफ हेवन' माना जाता है।
MCX पर कीमतों में जबरदस्त तेजी
इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी साफ देखने को मिला। सोने का जून फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 3.64% की बढ़त के साथ लगभग ₹1,47,372 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में भी 3.61% की मजबूती के साथ यह ₹1,43,924 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यह दिखाता है कि फ्यूचर्स मार्केट में सोने को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
देश भर के खुदरा बाजारों में भी उछाल
सिर्फ फ्यूचर्स मार्केट ही नहीं, बल्कि भारत के खुदरा बाजारों में भी सोने की कीमतों में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव ₹376 प्रति ग्राम बढ़ा है। वहीं, चेन्नई में सोने के दाम में सबसे तेज उछाल देखा गया, जहां 24 कैरेट गोल्ड ₹646 प्रति ग्राम महंगा हुआ। यह घरेलू स्तर पर सोने की मजबूत मांग को दर्शाता है।
आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार
हालांकि, सोने की कीमतों में यह तेजी कुछ आर्थिक चिंताओं के बीच आई है। अमेरिका से आने वाले महंगाई (Inflation) के आंकड़े, खासकर आने वाली 10 अप्रैल को जारी होने वाली मार्च की कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट, काफी महत्वपूर्ण रहेगी। फरवरी में अमेरिका की सालाना महंगाई दर 2.4% थी। अगर यह बढ़ती है, तो फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, मजबूत हो रहे अमेरिकी डॉलर (US Dollar) और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) भी सोने पर दबाव बना सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
JP Morgan के एनालिस्ट्स का मानना है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन नियर-टर्म में कुछ जोखिम बने हुए हैं। ऐसे एसेट्स, जिन पर कोई इंटरेस्ट नहीं मिलता, जैसे कि सोना, वे ऊंची ब्याज दरों के माहौल में दबाव में आ सकते हैं। ऐसे में, निवेशकों को मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाकर चलने की जरूरत होगी। कुल मिलाकर, सोने का भविष्य मिडिल ईस्ट के हालात और ग्लोबल इकोनॉमी के संकेतों पर निर्भर करेगा।