गोल्ड मार्केट में फिलहाल सुस्ती छाई है। ग्लोबल निवेशक अब अमेरिका के जरूरी इकोनॉमिक डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिसका सीधा असर फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर पड़ेगा। भारतीय बाजार में भी त्यौहारों के सीजन के बीच ऊंचे दाम खरीदारों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
बाजार का 'वेट एंड वॉच' मोड
सोने की कीमतें 1 अक्टूबर के शुरुआती कारोबार में $4,155 प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। घरेलू मोर्चे पर भी तस्वीर लगभग वैसी ही है, जहां MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,46,200 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। फिलहाल ट्रेडर्स किसी भी बड़े सौदे से पहले अमेरिकी मैक्रो-इकोनॉमिक रिपोर्ट्स के आने का इंतजार कर रहे हैं।
क्यों अहम है US डेटा?
बाजार की नजर मुख्य रूप से Core PCE Price Index और Nonfarm Payrolls के आंकड़ों पर है। ये रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के अगले रुख को तय करने में 'गेम चेंजर' साबित हो सकती हैं। अगर अमेरिकी आंकड़े मजबूत आते हैं, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है, जो सोने के लिए दबाव का काम करेगी क्योंकि सोना कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता है।
फेस्टिवल सीजन और चुनौतियां
फिलहाल US 10-year Treasury yield का 5.2% के करीब होना और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सोने की चमक को चुनौती दे रही हैं। भारतीय निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी कठिन है, क्योंकि पिछले साल की तुलना में सोने के दाम काफी ऊपर हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या त्यौहारों के सीजन में इतनी ऊंची कीमतों पर भी गहनों की डिमांड बनी रहती है या खरीदार पीछे हटते हैं।
अगले कुछ दिनों में आने वाला अमेरिकी महंगाई और जॉब्स का डेटा तय करेगा कि सोने की अगली चाल क्या होगी।
