गोल्ड की कीमतें फिलहाल ₹150,980 प्रति 10 ग्राम के आसपास कंसोलिडेट (Consolidate) कर रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और सुरक्षित निवेश की मांग के बीच निवेशक दुविधा में हैं।
भारत में सोने के भाव इस समय ₹150,980 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्पॉट गोल्ड $4,200 प्रति औंस के ऊपर ट्रेड कर रहा है। इस समय बाजार दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है—पहली, बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, जो सोने जैसे ब्याज न देने वाले एसेट पर दबाव डालती है, और दूसरी, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की निरंतर मांग।
यील्ड और सुरक्षा के बीच जंग
बढ़ती ट्रेजरी यील्ड सोने के लिए एक बाधा बनी हुई है, क्योंकि इससे निवेशकों के लिए बॉन्ड या कैश में निवेश करना अधिक आकर्षक हो जाता है। हालांकि, इस दबाव को संस्थागत खरीदारी से मजबूती मिल रही है। गोल्ड-बेक्ड ETFs में पिछले 4 वर्षों का सबसे अधिक निवेश देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि बड़े निवेशक इसे फिस्कल डेफिसिट के खिलाफ एक हेज (Hedge) के तौर पर देख रहे हैं। चीन के सेंट्रल बैंक सहित कई केंद्रीय बैंक लगातार अपने रिजर्व में सोना जोड़ रहे हैं, जो कीमतों को एक सपोर्ट दे रहा है।
तकनीकी स्तरों पर नजर
तकनीकी चार्ट्स के अनुसार, सोना अभी एक दायरे में सीमित है। स्थानीय स्तर पर रेजिस्टेंस (Resistance) ₹155,000 के आसपास है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $4,228 से $4,293 के बीच है। ऊपर की ओर जाने के लिए इन स्तरों को तोड़ना जरूरी है। वहीं, ₹149,000 से ₹150,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (Support) की तरह काम कर रहा है।
रिस्क और बाजार के संकेत
निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर टिकी हैं। अगर फेड की तरफ से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने जैसे कठोर (Hawkish) संकेत आते हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, USD-INR एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव भी भारतीय निवेशकों के लिए अहम है। आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व की बातचीत और नए आर्थिक आंकड़े यह तय करेंगे कि क्या सोना इस दायरे को तोड़ पाएगा या यह दबाव में बना रहेगा।
