महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बीच Gold की कीमतें एक साल के निचले स्तर पर आ गई हैं। भारत में सोना **₹1.40 लाख** प्रति 10 ग्राम के नीचे फिसल गया है, क्योंकि निवेशक अब सुरक्षित निवेश की जगह ब्याज देने वाली एसेट्स को तरजीह दे रहे हैं।
ब्याज दरों का असर
सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी इसमें निवेश करने पर न तो कोई ब्याज मिलता है और न ही डिविडेंड। ऐसे में जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रखता है, तो सरकारी बॉन्ड्स जैसे विकल्प निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं। यही कारण है कि निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरी एसेट्स में लगा रहे हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स $3,885 प्रति औंस के करीब आ गए हैं।
भारतीय बाजार पर दबाव
इस ग्लोबल हलचल का सीधा असर भारत में देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के साइकोलॉजिकल लेवल के नीचे आ गए हैं। चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल इंफ्लेशन डेटा ने सोने की 'सेफ-हेवन' वाली चमक को फिलहाल फीका कर दिया है।
आगे क्या होगा?
तकनीकी तौर पर सोना 'ओवरसोल्ड' जोन में है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि रिकवरी में रुकावट आ सकती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल्स पर है। इन डेटा पॉइंट्स के आधार पर ही फेडरल रिजर्व भविष्य की ब्याज दरों पर अपना रुख तय करेगा। फिलहाल, जब तक महंगाई का रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक सोने में उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी संभावना है।
