सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट देखने को मिली है। 2 सितंबर, 2026 को गोल्ड का भाव गिरकर **$4,304** प्रति औंस के तीन हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका है।
महंगाई और ब्याज दरों का डर\n\nबाजार में सोने की चमक फीकी पड़ने के पीछे भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव एक बड़ा कारण है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल (oil) की कीमतों में उछाल आया है। इससे बाजार में यह डर पैदा हो गया है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है। इसका सीधा असर फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ता दिख रहा है।\n\nमार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सितंबर की बैठक में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है। इसकी संभावना 66% से 70% के बीच जताई जा रही है। चूंकि सोना कोई डिविडेंड या ब्याज नहीं देता है, इसलिए जब सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक गोल्ड से अपना पैसा निकालकर दूसरी सुरक्षित और फायदेमंद जगहों पर लगाना शुरू कर देते हैं।\n\n### टेक्निकल दबाव\n\nटेक्निकल चार्ट पर भी सोना कमजोर नजर आ रहा है। यह अपने 200-डे मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है। कमोडिटी मार्केट में जब कोई एसेट इस अहम लेवल के नीचे फिसलती है, तो इसे लंबी अवधि के लिए कमजोरी का संकेत माना जाता है।\n\nयह गिरावट सिर्फ सोने तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी प्रीशियस मेटल सेक्टर में दबाव दिखा। स्पॉट सिल्वर (Silver) में 1% की गिरावट आई, जबकि प्लेटिनम और पैलेडियम के भाव भी लाल निशान में बंद हुए।\n\n### अब निवेशकों की नजर कहां है?\n\nआने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह से फेडरल रिजर्व की कमेंट्री और महंगाई के नए आंकड़ों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें भी लगातार मॉनिटर की जा रही हैं। अगर एनर्जी कॉस्ट बढ़ती रही, तो फेडरल रिजर्व का रुख 'हॉकिश' (hawkish) बना रह सकता है, जिससे सोने की रिकवरी में रुकावट आ सकती है।