ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में सुस्ती जारी है। गोल्ड की कीमत **$4,170** प्रति औंस तक फिसल गई है और यह इस महीने करीब **6%** की गिरावट की ओर बढ़ रहा है।
बाजार पर दबाव क्यों?
बुधवार को स्पॉट गोल्ड 0.2% की गिरावट के साथ $4,170.63 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है। सोने में यह कमजोरी मुख्य रूप से US के आने वाले Personal Consumption Expenditures (PCE) इंडेक्स को लेकर निवेशकों की चिंता की वजह से है। यह इंडेक्स फेडरल रिजर्व के लिए महंगाई मापने का सबसे पसंदीदा जरिया है।
क्यों गिर रहा है सोना?
गोल्ड एक नॉन-यील्डिंग एसेट (Non-yielding asset) है, यानी इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, तो सरकारी बॉन्ड्स जैसे विकल्प निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इसके अलावा, मजबूत डॉलर सोने को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगा बना देता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है।
आगे की राह और क्या कहते हैं आंकड़े?
CME FedWatch Tool के अनुसार, अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 47% है, जो दिसंबर तक बढ़कर 91% तक पहुंचने का अनुमान है। अगर महंगाई का डेटा उम्मीद से ज्यादा आता है, तो सोने की कीमतों में और दबाव दिख सकता है और यह $4,100 के स्तर को टेस्ट कर सकता है। वहीं, अगर आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो सोना $4,200 की ओर वापसी कर सकता है।
न्यूयोर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स भी महंगाई को 2% के लक्ष्य पर लाने के लिए सख्त रुख के संकेत दे चुके हैं, जिसका असर चांदी और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है।
