अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के संभावित संकेतों के चलते सोना (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में लगातार छठे हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है। मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और कम होती जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) ने प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) को निवेशकों के लिए कम आकर्षक बना दिया है, जिससे वे अब ब्याज देने वाली एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
क्या हुआ?
प्रीशियस मेटल्स में गिरावट का सिलसिला जारी है। सोना और चांदी, दोनों की कीमतें लगातार छठे हफ्ते नीचे आई हैं। सोने का भाव गिरकर लगभग 4,185.44 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो एक हफ्ते का निचला स्तर है। चांदी में भी करीब 0.8% की गिरावट देखी गई और यह 65.13 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इस बिकवाली के दबाव से कमोडिटी मार्केट (Commodities Market) में कमजोरी का माहौल बना हुआ है, क्योंकि निवेशक अमेरिका की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में बदलावों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
फेडरल रिजर्व का रुख क्यों अहम है?
इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का आउटलुक है। हालिया मीटिंग में ब्याज दरों को स्थिर रखा गया था, लेकिन सेंट्रल बैंक ने अभी भी महंगाई को लेकर चिंता जताई है। इसका मतलब है कि उधार लेने की लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है। CME FedWatch Tool के अनुसार, ट्रेडर्स दिसंबर 2026 तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 86% से अधिक संभावना देख रहे हैं।
सोने के निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात है। सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट (Non-yielding asset) है, यानी इससे कोई ब्याज या डिविडेंड (Dividend) नहीं मिलता। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) या बचत योजनाओं जैसी एसेट्स को प्राथमिकता देते हैं, जिनसे गारंटीड रिटर्न मिलता है। ऐसे में, सोने को होल्ड करने की अपील कम हो जाती है, जिससे अक्सर बिकवाली बढ़ जाती है।
अमेरिकी डॉलर की भूमिका
यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY), जो अन्य मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्य को मापता है, 100.8 के आसपास कारोबार कर रहा है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना और चांदी को महंगा बना देता है, खासकर उनके लिए जो दूसरी करेंसी इस्तेमाल करते हैं। जब डॉलर मजबूत होता है, तो इन वैश्विक खरीदारों की परचेजिंग पावर (Purchasing Power) कम हो जाती है, जिससे प्रीशियस मेटल्स जैसी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Dollar-denominated commodities) की मांग दब जाती है। डॉलर की यह मजबूती सोने के बाजार के लिए एक बड़ी बाधा बन रही है।
जियो-पॉलिटिकल टेंशन और तेल की कीमतें
ऐतिहासिक रूप से, सोना अक्सर वैश्विक अनिश्चितता या संघर्ष के समय एक सेफ-हेवन एसेट (Safe-haven asset) के रूप में खरीदा जाता रहा है। हालांकि, हाल ही में मध्य पूर्व में जियो-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के कम होने के संकेत मिलने से इसकी सुरक्षात्मक अपील फीकी पड़ गई है। इसका असर एनर्जी मार्केट (Energy Markets) में भी दिख रहा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते 10% से ज्यादा की गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। शांति वार्ता में संभावित प्रगति की खबरों ने बाजार के डर को कम किया है, जिससे सोने की वह प्रीमियम कीमत भी कम हो गई है जो संकट के समय में अक्सर मिलती है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
प्रीशियस मेटल्स सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को कुछ प्रमुख संकेतकों पर ध्यान देना चाहिए। पहला, आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, खासकर महंगाई से जुड़ी रिपोर्ट, फेडरल रिजर्व के फैसलों और नतीजतन सोने की कीमतों को प्रभावित करेंगी। दूसरा, यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण है; डॉलर में लगातार बढ़ोतरी कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है। आखिर में, जियो-पॉलिटिकल डेवलपमेंट (Geopolitical Developments) में कोई भी बदलाव या वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव यह तय करेगा कि सोना अपनी सेफ-हेवन एसेट की स्थिति वापस पाता है या नहीं। बॉन्ड यील्ड्स (Bond yields) पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा, जो अक्सर सोने के विपरीत चलते हैं, और यह समझने में मदद करेगा कि वर्तमान आर्थिक माहौल में पूंजी कहां प्रवाहित हो रही है।
