ग्लोबल मार्केट में सोने की चमक फीकी पड़ गई है। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड का भाव $4,300 प्रति औंस के नीचे आ गया है। यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब सोने में कमजोरी देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की प्रबल संभावना है।
ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है। 15 सितंबर, 2026 तक गोल्ड की कीमत $4,300 प्रति औंस के स्तर से नीचे ट्रेड कर रही है। निवेशकों की नजरें अब 15-16 सितंबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं।
गिरावट की मुख्य वजह
बाजार में चर्चा है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है। डेटा के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की संभावना 90% से ज्यादा है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो गोल्ड की मांग कम हो जाती है क्योंकि सरकारी बॉन्ड्स जैसे एसेट्स बेहतर रिटर्न देने लगते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और $100 प्रति बैरल के पार निकले कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने भी सोने के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
भारतीय बाजार और MCX पर असर
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने और चांदी के वायदा भाव (Futures) वैश्विक संकेतों को ही फॉलो कर रहे हैं। चूंकि भारत गोल्ड का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में आने वाली किसी भी गिरावट का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
टेक्निकल चार्ट और भविष्य की राह
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड के लिए $4,280 से $4,300 के स्तर पर अहम सपोर्ट है। अगर कीमतें इस स्तर के नीचे बनी रहती हैं, तो और अधिक बिकवाली देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों को 16 सितंबर को होने वाली फेड की टिप्पणी का इंतजार है, जो सोने की अगली दिशा तय करेगी। तब तक बाजार में सतर्कता बनी रहेगी और बड़े सौदे करने से ट्रेडर बच रहे हैं।
