भारतीय सर्राफा बाज़ार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। जनवरी के उच्चतम स्तर से **30%** की कमी के बावजूद, खुदरा खरीदार सुस्त बने हुए हैं और कीमतों में स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, थोक मांग में कुछ सुधार देखा गया है, अब बाज़ार त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रहा है।
कीमतों में क्यों आई भारी गिरावट?
देश के घरेलू गोल्ड मार्केट में इस समय बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव जनवरी के करीब ₹2.04 लाख प्रति 10 ग्राम से गिरकर अब लगभग ₹1.43 लाख के स्तर पर आ गया है। इतने बड़े करेक्शन के बावजूद, मुंबई के ज़वेरी बाज़ार जैसे पारंपरिक ज्वेलरी हब में ग्राहकों की रौनक फीकी है। खुदरा खरीदार 'रुको और देखो' की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से जब कीमतें तेज़ी से गिरती हैं, तो खरीदार और गिरावट के डर से खरीदारी से कतराते हैं।
थोक खरीदार कर रहे स्टॉक, रिटेल में सुस्ती
खुदरा ग्राहकों के सतर्क रहने के विपरीत, थोक या बिज़नेस-टू-बिज़नेस (B2B) सेगमेंट में इन्वेंटरी बढ़ाने के संकेत मिलने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ज्वैलर्स और डीलर्स मौजूदा कीमतों को लंबी अवधि के लिए आकर्षक मानकर स्टॉक जमा कर रहे हैं। खुदरा क्षेत्र की सावधानी और थोक में सक्रियता के बीच यह अंतर बाज़ार की मौजूदा स्थिति को आकार दे रहा है। उद्योग के सदस्य इस बात पर नज़र बनाए हुए हैं कि क्या कीमतें स्थिर रहती हैं, क्योंकि उपभोक्ता विश्वास और शादी के सीजन में मांग बढ़ने के लिए कीमतों का स्थिर होना अक्सर ज़रूरी होता है।
मैक्रोइकॉनॉमिक्स और सरकारी नीतियों का असर
इस गिरावट के पीछे कई बाहरी कारण भी हैं। अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने और फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में भी लगभग 28% की गिरावट आई है, जो अब लगभग $4,000 प्रति औंस के आसपास हैं। घरेलू स्तर पर, मई में लगाए गए 15% के इंपोर्ट ड्यूटी का असर खुदरा कीमतों पर बना हुआ है। इसके अलावा, सरकार द्वारा गैर- ज़रूरी सोने के आयात पर खर्च कम करने के उपायों ने भी बाज़ार के उत्साह को धीमा किया है। इन नीतियों ने मिलकर एक मुश्किल माहौल बनाया है, जहाँ खुदरा विक्रेताओं को बदलते उपभोक्ता रुझानों और बड़े मैक्रो दबावों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएँ
भारतीय उपभोक्ता सोने की खरीदारी को लेकर ज़्यादा सचेत हो गए हैं। अपने बजट को संभालने के लिए, कई लोग अब कम कैरट वाले गहने या बारीक डिज़ाइन वाले आभूषणों को तरजीह दे रहे हैं, जो बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स की रणनीति से मेल खाता है। साथ ही, गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम्स भी लोकप्रिय हुए हैं, क्योंकि ग्राहक ज़्यादा पैसा लगाए बिना अपने सोने के कलेक्शन को अपग्रेड करना चाहते हैं। आगे चलकर, उद्योग को उम्मीद है कि अक्टूबर से फरवरी का समय, जिसमें प्रमुख त्यौहार और शादी का सीजन आता है, मांग को ज़रूरी बढ़ावा देगा। निवेशकों और बाज़ार के जानकारों के लिए, अगली बड़ी खबर यह होगी कि सोने की कीमतें इस मौजूदा दायरे में बनी रहती हैं या त्योहारी सीजन नज़दीक आने पर और अधिक उतार-चढ़ाव देखती हैं।
