ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में **1.63%** की गिरावट आई है, जिसके बाद भाव **$4,215** प्रति औंस पर आ गए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने के संकेत ने सोने की चमक को कुछ समय के लिए फीका कर दिया है।
बाजार पर फेड का दबाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में किसी भी नरमी के संकेत न मिलने से निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा है। 28 सितंबर, 2026 को स्पॉट गोल्ड में 1.63% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.75% गिरकर $4,245.40 प्रति औंस पर आ गए।
चूंकि सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जहां उन्हें सुरक्षित और निश्चित रिटर्न मिलता है।
भारतीय बाजार में असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारतीय बाजार में गिरावट कम रही। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स केवल 0.12% टूटकर ₹1,50,700 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यह संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
चांदी की चमक बरकरार
सोने के विपरीत, चांदी ने सबको हैरान किया। दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स 0.65% की बढ़त के साथ ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इसका बड़ा कारण सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग है।
आगे की राह
गोल्ड की कीमतें अब मुख्य रूप से अमेरिकी महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर निर्भर करेंगी, जो फेडरल रिजर्व की अगली चाल तय करेंगे। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तनाव जैसी भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने को एक 'सेफ हेवन' के रूप में सपोर्ट दे सकती हैं, जो कीमतों को बहुत ज्यादा गिरने से बचाने का काम करेगा।
