MCX पर सोने के भावों में मुनाफावसूली (Profit-booking) देखने को मिल रही है। अक्टूबर वायदा (October Futures) ₹1,52,400–₹1,52,600 के रेजिस्टेंस ज़ोन के पास कंसोलिडेट (Consolidate) कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया तेज़ी के बाद अब बाज़ार में कुछ नरमी आ सकती है।
सोने की कीमत में कंसॉलिडेशन का दौर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के दाम में फिलहाल कंसॉलिडेशन का दौर चल रहा है। अक्टूबर वायदा (October Futures) ₹1,52,400 से ₹1,52,600 के अहम रेजिस्टेंस लेवल को पार करने में संघर्ष कर रहा है। बाज़ार के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय से आई ताबड़तोड़ तेज़ी के बाद अब निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं।
टेक्निकल इंडिकेटर्स और मोमेंटम
बाज़ार विश्लेषकों का ध्यान इस बात पर है कि सोने की हालिया तेज़ी अब टेक्निकल रेजिस्टेंस से टकरा रही है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे इंडिकेटर्स 62 पर हैं, जो बताते हैं कि बाज़ार की तेजी अब थोड़ी धीमी पड़ सकती है। बोलिंगर बैंड्स (Bollinger Bands) के मुकाबले कीमतों की मौजूदा स्थिति भी यही इशारा कर रही है कि पिछले सत्रों में देखी गई तेज़ उछाल अब थम सकती है।
हालांकि, सोने का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है। लेकिन, शॉर्ट-टर्म चार्ट्स में थोड़ी थकान के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा प्राइस एक्शन को देखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि ₹1,52,600 से ₹1,53,000 का रेंज सोने के लिए एक मज़बूत सीलिंग का काम कर रहा है। अगर कीमतें ₹1,51,500 और ₹1,51,000 के सपोर्ट लेवल से नीचे फिसलती हैं, तो बाज़ार में गिरावट का रुख देखने को मिल सकता है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
सोने की कीमतों पर ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक हालात का असर जारी है। खासकर, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (US Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और आने वाले महंगाई के आंकड़े (Inflation Data) कीमतों में उतार-चढ़ाव ला रहे हैं। इन ग्लोबल सिग्नल्स की वजह से बुलियन मार्केट में वोलेटिलिटी (Volatility) बढ़ी है, जिससे ट्रेडर्स रेजिस्टेंस लेवल पर मुनाफावसूली कर रहे हैं।
फिलहाल, इंट्राडे ट्रेडर्स में 'सेल-ऑन-राइज' (Sell-on-rise) की रणनीति हावी दिख रही है, जो इन ऊंचे दामों पर सावधानी का संकेत देती है। बुलियन मार्केट पर नज़र रखने वाले निवेशकों को यह देखना होगा कि सोना अपनी तेजी बनाए रख पाता है या इसमें बड़ी गिरावट आती है। इन रेजिस्टेंस लेवल्स के आसपास कीमतों का प्रदर्शन और कोई भी नया मैक्रो-इकोनॉमिक ट्रिगर सोने की दिशा तय करेगा।
