अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें दो महीने के निचले स्तर के करीब संघर्ष कर रही हैं। मजबूत डॉलर और ऊंचे ट्रेजरी यील्ड के दबाव के बीच, भारतीय निवेशकों के लिए गिरता रुपया और महंगा कच्चा तेल नई चुनौती बनकर उभरा है।
ग्लोबल गोल्ड मार्केट फिलहाल काफी दबाव में है और कीमतें $4,110 प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि इंट्रा-डे में रिकवरी की छोटी कोशिशें हुई हैं, लेकिन मजबूती के संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसका मुख्य कारण डॉलर में मजबूती और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड है, जो सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स की चमक कम कर रही है।
अमेरिकी मौद्रिक नीति का असर
गोल्ड की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह US Federal Reserve की पॉलिसी है। मार्केट में 78-87% संभावना जताई जा रही है कि दिसंबर 2026 तक अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। 'हायर-फॉर-लॉन्गर' इंटरेस्ट रेट्स के कारण निवेशकों का रुझान सरकारी बॉन्ड्स की ओर बढ़ गया है, जिससे सोने से पैसा निकल रहा है।
भारत पर दोहरी मार
भारतीय निवेशकों के लिए स्थितियां और जटिल हैं। रुपया गिरकर 96.78 प्रति डॉलर पर आ गया है, जिससे सोना इंपोर्ट करना महंगा हो गया है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $101.93 प्रति बैरल तक पहुंचने से महंगाई का डर बढ़ गया है, जो रुपये पर और दबाव बना रहा है।
टेक्निकल लेवल्स: ध्यान कहां रखें?
घरेलू बाजार में ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर एक बड़ी बाधा बना हुआ है। यदि सोना इस स्तर को पार करने में विफल रहता है, तो करेक्शन और गहरा सकता है। साथ ही, सिल्वर पर भी नजर रखें, जहां ₹2.22 लाख से ₹2.23 लाख प्रति किलोग्राम का रेंज काफी क्रिटिकल है। आने वाले हफ्तों में US Fed की कमेंट्री, रुपये की चाल और क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीक नजर रखना जरूरी होगा।
