Gold Price Update: डॉलर की मजबूती से सोने पर गिरी बिजली, 16% और गिरने का खतरा!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Price Update: डॉलर की मजबूती से सोने पर गिरी बिजली, 16% और गिरने का खतरा!

गोल्ड की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! पिछले रिकॉर्ड हाई से **27%** सस्ता हुआ सोना। मजबूत डॉलर और बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतें बन रहीं वजह। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में **16%** और गिरावट आ सकती है, पर सेंट्रल बैंक की खरीदारी से लॉन्ग-टर्म सपोर्ट बना रहेगा।

सोने की कीमतों में क्यों आई भारी गिरावट?

इंटरनेशनल गोल्ड की कीमतों में हालिया तेजी के बाद अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले दो सालों में लगभग दोगुना होने के बाद, सोना अब अपने ऑल-टाइम हाई से 27% नीचे आ गया है। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमत में और 16% की गिरावट आ सकती है, और यह $3400 - $3500 प्रति औंस तक जा सकता है।

गिरावट के मुख्य कारण

इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजहें हैं -

  1. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर: जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है।
  2. बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतें: क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ने का डर बढ़ जाता है, जिससे निवेशक सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स से दूरी बना सकते हैं।

इन सबके चलते, निवेशकों को डर है कि इंटरेस्ट रेट्स बढ़ सकते हैं, जो सोने के लिए अच्छा संकेत नहीं है। फरवरी के अंत से ही सोने की कीमतों में 23% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

सपोर्ट लेवल्स और आगे का अनुमान

भले ही फिलहाल सोने की चाल धीमी दिख रही हो, लेकिन एक्सपर्ट्स कुछ अहम सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखे हुए हैं।

  • Geojit Financial Services के एनालिस्ट्स के अनुसार, $3400 - $3500 का ज़ोन ऐसा है जहाँ कीमत स्थिर हो सकती है।
  • Samco Securities की रिसर्च टीम $4000 को एक बड़ा लेवल मान रही है, हालांकि उनका मानना है कि पैनिक सेलिंग से कीमतें $3500 तक गिर सकती हैं।

इसके बावजूद, कई एनालिस्ट्स का लॉन्ग-टर्म नजरिया पॉजिटिव है। उनका मानना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से गोल्ड को हमेशा एक सेफ-हेवन माना जाएगा।

सेंट्रल बैंकों की खरीदारी का महत्व

गोल्ड की कीमतों को सबसे बड़ा सहारा सेंट्रल बैंकों की लगातार हो रही खरीदारी से मिल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के मुताबिक, पिछले 4 सालों में दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने औसतन हर साल 1000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के मुकाबले काफी ज्यादा है।

हाल के नतीजों के चलते सोने की खरीदारी थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन इन संस्थानों की लगातार डिमांड कीमतों को और ज्यादा गिरने से रोक रही है। HSBC जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस ने अपने अनुमानों को थोड़ा बदलकर $4560 प्रति औंस कर दिया है, लेकिन उनका भी मानना है कि सेंट्रल बैंकों की खरीदारी सोने की कीमतों को अनिश्चित काल तक गिरने से बचाएगी।

आगे चलकर, निवेशकों को सेंट्रल बैंकों की खरीदारी के पैटर्न और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पर खास ध्यान देना होगा। साथ ही, महंगाई के आंकड़े और ग्लोबल टेंशन भी सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

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