1 सितंबर 2026 को भारत में सोने की कीमतों में लगभग **0.10%** की हल्की तेजी दर्ज की गई है। हालांकि रिटेल कीमतों में उछाल आया है, लेकिन ग्लोबल इंटरेस्ट रेट और सरकार की अपील के कारण मार्केट पर दबाव बना हुआ है।
भारत में 1 सितंबर 2026 को सोने की कीमतों में सुस्ती के बीच एक मामूली सुधार देखने को मिला है। प्रमुख मेट्रो शहरों में 22-कैरेट और 24-कैरेट सोना लगभग 0.10% की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। पिछले कई सत्रों की गिरावट के बाद यह एक छोटा सा रिकवरी प्रयास है, लेकिन सोना अभी भी अपने दो-सप्ताह के निचले स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है।
ग्लोबल इंटरेस्ट रेट का दबाव
सोने की तेजी के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा ग्लोबल इंटरेस्ट रेट को लेकर अनिश्चितता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के हालिया बयानों ने मार्केट में हलचल पैदा कर दी है। उनके 'हॉकिश' रुख के बाद सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है क्योंकि इसमें डिविडेंड या फिक्स्ड इंटरेस्ट नहीं मिलता है। इसी वजह से मार्केट में काफी वोलेटिलिटी बनी हुई है।
सरकारी अपील और घरेलू मांग
घरेलू स्तर पर सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को सीमित रखें ताकि देश की आर्थिक स्थिरता बनी रहे। इस निर्देश का ज्वेलरी सेक्टर पर असर पड़ सकता है। अगर फेस्टिव सीजन में ग्राहकों की मांग घटती है, तो बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के लिए रेवेन्यू जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
फिलहाल सोने के मार्केट में दो तरह की ताकतें काम कर रही हैं। एक तरफ जियो-पॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दे रही हैं, तो दूसरी तरफ बढ़ती ब्याज दरों की आशंका कीमतों पर लगाम लगा रही है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे आने वाले दिनों में अमेरिका के इंफ्लेशन डेटा और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयानों पर नजर रखें, क्योंकि यही सोने की अगली चाल तय करेंगे।
