सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली तेजी देखी गई, जहां स्पॉट गोल्ड **$4,160** प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। निवेशकों की निगाहें अब अमेरिका के आने वाले इकोनॉमिक डेटा और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे।
सोमवार, 5 अक्टूबर को सोने की कीमतों में हल्की रिकवरी देखी गई। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,160 प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जबकि US गोल्ड फ्यूचर्स लगभग $4,190 प्रति औंस तक पहुंच गए हैं। भारतीय बाजार में भी मजबूती बनी हुई है, जहां MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,50,250 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर बना हुआ है।
डेटा पर टिकी बाजार की नजरें
फिलहाल मार्केट सेंटीमेंट पूरी तरह से अमेरिकी इकोनॉमी के आंकड़ों पर निर्भर है। कोर PCE प्राइस इंडेक्स और नॉनफार्म पेरोल्स जैसे डेटा यह तय करेंगे कि फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। गोल्ड चूंकि एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, इसलिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने के आकर्षण को कम कर देती है। निवेशक इन आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें फेडरल रिजर्व की भविष्य की पॉलिसी का संकेत मिल सके।
सितंबर की गिरावट का असर
यह तेजी ऐसे समय आई है जब सितंबर का महीना सोने के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। पिछले महीने सोने में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई थी, जो जून के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। डॉलर की मजबूती और ऊंचे ब्याज दरों के माहौल ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया था।
आगे की रणनीति
निवेशकों के लिए जोखिम अभी भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। यदि लेबर मार्केट और महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहते हैं, तो फेड रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है, जो सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में पेरोल और महंगाई के आंकड़ों में कोई भी बड़ा बदलाव सोने की कीमतों में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
