Global मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट देखने को मिल रही है। मजबूत US डॉलर और बढ़ती Treasury Yields के चलते सोने की चमक कम हुई है, जबकि निवेशकों की नजरें अब US नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर टिकी हैं।
सोना क्यों है दबाव में?
ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर इस हफ्ते भारी दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर के 17-महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंचने से सोने की खरीदारी महंगी हो गई है, जिससे विदेशी खरीदारों का रुझान कम हुआ है। साथ ही, 10-वर्षीय US ट्रेजरी यील्ड का 2002 के बाद के उच्चतम स्तरों को छूना भी सोने के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। चूंकि सोने में कोई निश्चित ब्याज (interest) नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अब बॉन्ड्स जैसे इंटरेस्ट-बेयरिंग सिक्योरिटीज की ओर रुख कर रहे हैं।
अब सबकी नजरें US जॉब्स डेटा पर
निवेशक बेसब्री से US के नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। यह डेटा फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की आने वाली पॉलिसी के लिए बेहद अहम है। अगर जॉब मार्केट का डेटा मजबूत आता है, तो फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है, जो सोने की कीमतों के लिए निगेटिव माना जाता है।
भारतीय निवेशकों के लिए अपडेट
आज गांधी जयंती के अवसर पर Multi Commodity Exchange (MCX) बंद है, जिसके चलते घरेलू बाजार में फिलहाल कोई हलचल नहीं है। इस वजह से भारतीय निवेशक आज ग्लोबल मार्केट में हो रही भारी उथल-पुथल से दूर हैं।
मिडल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद, बाजार का पूरा फोकस फिलहाल अमेरिका की मॉनेटरी पॉलिसी और आने वाले जॉब्स नंबर्स पर है। डेटा कैसा रहता है, इसी से तय होगा कि आने वाले दिनों में सोने को सपोर्ट मिलेगा या गिरावट का दौर और लंबा चलेगा।
