अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold की कीमतें फिलहाल **$4,159** प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं। निवेशकों की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर टिकी हैं, जिससे दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की **85%** संभावना ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
फेड मिनट्स का इंतजार
बुधवार को सोने की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली। मार्केट पार्टिसिपेंट्स फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं क्योंकि सभी की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर की पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स पर हैं। इन मिनट्स से यह साफ हो पाएगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है।
क्यों दबाव में है सोना?
सोने की कीमतों में चल रहे उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह अमेरिकी ब्याज दरें हैं। जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रखता है, तो सोने जैसे बिना ब्याज देने वाले एसेट्स (non-interest paying assets) निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाते हैं। मौजूदा डेटा के अनुसार, दिसंबर 2026 तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 85% संभावना है। मैरी डेली (Mary Daly) और जेफ श्मिट (Jeff Schmid) जैसे फेड अधिकारियों के हालिया बयानों से भी यह स्पष्ट है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए वे और कठोर कदम उठाने को तैयार हैं।
लंबी अवधि का आउटलुक
तत्काल भले ही बाजार में सतर्कता का माहौल हो, लेकिन जानकारों का नजरिया सकारात्मक है। हाल ही में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की कॉन्फ्रेंस में जानकारों ने अनुमान जताया है कि अगले 12 महीनों में सोना $5,013 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, वैश्विक अस्थिरता, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट के हालात, इस तेजी में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव घरेलू बाजार को सीधे प्रभावित करता है, क्योंकि इस पर डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल का भी असर पड़ता है। निवेशकों को फेड मिनट्स के उन हिस्सों पर खास ध्यान देना होगा जिसमें ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की चर्चा की गई हो।
