सोमवार को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आई, जबकि चांदी अपने बढ़त को बनाए रखने में कामयाब रही। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
सोमवार, 10 अगस्त 2026 को कीमती धातुओं के बाज़ार में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। पिछले हफ्ते की जोरदार तेजी के बाद निवेशक अपनी पोजीशन एडजस्ट कर रहे थे। पिछले हफ्ते लगभग 7% की बढ़त दर्ज करने के बाद, सोने के वायदा भाव (Gold Futures) में लगभग 0.38% की मामूली गिरावट आई और यह $4,383 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी में मजबूती दिखी और इसमें 0.23% की बढ़त के साथ $63.645 प्रति औंस पर कारोबार हुआ, जो पिछले सत्र में 10% की बड़ी बढ़त के बाद आया है।
बाज़ार में यह हलचल मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ब्याज दर नीति को लेकर बदलती उम्मीदों से प्रेरित है। हाल ही में, अमेरिकी श्रम बाज़ार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आए थे, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता कम हुई है। यह आमतौर पर सोने की कीमतों के लिए सहायक होता है, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। हालांकि, सोमवार को सोने की कीमतों में आई मामूली गिरावट यह दर्शाती है कि कुछ ट्रेडर्स पिछले हफ्ते की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली कर रहे हैं।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाज़ार को प्रभावित कर रहा है, खासकर अमेरिका-ईरान संबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित शिपिंग व्यवधान। इस तरह की अनिश्चितता अक्सर निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर आकर्षित करती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर का उतार-चढ़ाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है। जब डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले कमजोर होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को समर्थन मिलता है।
निवेशकों को मौजूदा बाज़ार माहौल में जोखिमों से सावधान रहना चाहिए। सबसे तात्कालिक कारक आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (US consumer price inflation) के आंकड़े हैं। यदि यह रिपोर्ट उम्मीद से अधिक मुद्रास्फीति दर्शाती है, तो फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ सकता है, जिससे अक्सर सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, यदि पश्चिम एशिया में राजनयिक तनाव कम होता है, तो कीमती धातुओं की मांग कम हो सकती है, जिससे कीमतों में गिरावट की संभावना है।
आने वाले समय में बाज़ार में अस्थिरता बने रहने की उम्मीद है। अगली महत्वपूर्ण घटना अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े होंगे, जो ब्याज दरों के भविष्य और, तदनुसार, कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा के बारे में अधिक स्पष्टता प्रदान करेंगे। तब तक, ट्रेडर्स संभवतः धीमी अमेरिकी आर्थिक वृद्धि की संभावना और लगातार बनी रहने वाली मुद्रास्फीति के जोखिम के बीच संतुलन बनाते रहेंगे।
